Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 29 / Mantra 2

62 Sukta
16 Mantra
3/29/2
Devata- अग्निः Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒रण्यो॒र्निहि॑तो जा॒तवे॑दा॒ गर्भ॑इव॒ सुधि॑तो ग॒र्भिणी॑षु। दि॒वेदि॑व॒ ईड्यो॑ जागृ॒वद्भि॑र्ह॒विष्म॑द्भिर्मनु॒ष्ये॑भिर॒ग्निः॥

अ॒रण्योः॑ । निऽहि॑तः । जा॒तऽवे॑दाः । गर्भः॑ऽइव । सुऽधि॑तः । ग॒र्भिणी॑षु । दि॒वेऽदि॑वे । ईड्यः॑ । जा॒गृ॒वत्ऽभिः॑ । ह॒विष्म॑त्ऽभिः । म॒नु॒ष्ये॑भिः । अ॒ग्निः ॥

Mantra without Swara
अरण्योर्निहितो जातवेदा गर्भइव सुधितो गर्भिणीषु। दिवेदिव ईड्यो जागृवद्भिर्हविष्मद्भिर्मनुष्येभिरग्निः॥

अरण्योः। निऽहितः। जातऽवेदाः। गर्भःऽइव। सुऽधितः। गर्भिणीषु। दिवेऽदिवे। ईड्यः। जागृवत्ऽभिः। हविष्मत्ऽभिः। मनुष्येभिः। अग्निः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 32 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
जिन (हविष्मद्भिः) बहुत साधनों के ग्रहण करने तथा (जागृवद्भिः) अविद्या आलस्य और निद्रा त्याग विद्या और पुरुषार्थ आदि को प्राप्त होने और (मनुष्येभिः) मनन करनेवाले पुरुषों ने (अरण्योः) ऊपर और नीचे के भाग में वर्त्तमान साधनों के मध्य में (निहितः) स्थित (गर्भिणीषु) गर्भवती स्त्रियों में (गर्भइव) जैसे गर्भ रहता वैसे वर्त्तमान (दिवेदिवे) प्रतिदिन (ईड्यः) खोजने योग्य (जातवेदाः) उत्पन्न हुए सम्पूर्ण पदार्थों में वर्त्तमान (अग्निः) अग्नि (सुधितः) उत्तम प्रकार धारण किया, उन पुरुषों को भाग्यशाली जानना चाहिये ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो मनुष्य सृष्टि के क्रम से वर्त्तमान अग्नि आदि पदार्थों की प्रतिदिन परीक्षा करें करावें, तो वे क्यों दरिद्र होवें ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.