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Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 9

62 Sukta
15 Mantra
3/27/9
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
धि॒या च॑क्रे॒ वरे॑ण्यो भू॒तानां॒ गर्भ॒मा द॑धे। दक्ष॑स्य पि॒तरं॒ तना॑॥

धि॒या । च॒क्रे॒ । वरे॑ण्यः । भू॒ताना॑म् । गर्भ॑म् । आ । द॒धे॒ । दक्ष॑स्य । पि॒तर॑म् । तना॑ ॥

Mantra without Swara
धिया चक्रे वरेण्यो भूतानां गर्भमा दधे। दक्षस्य पितरं तना॥

धिया। चक्रे। वरेण्यः। भूतानाम्। गर्भम्। आ। दधे। दक्षस्य। पितरम्। तना॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 29 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हे मनुष्यो ! जो (वरेण्यः) आदर करने योग्य अति श्रेष्ठ पुरुष (तना) विस्तारयुक्त (धिया) श्रेष्ठ बुद्धि वा शिक्षा से (दक्षस्य) चतुर विद्यार्थीपुरुष के (पितरम्) पिता के सदृश पालनकर्त्ता (भूतानाम्) प्राणियों के (गर्भम्) विद्या आदि उत्तम गुणों को स्थिति करने रूप गर्भ को (आ) (दधे) सब प्रकार धारण करे और विद्यासम्बन्धी वृद्धि को (चक्रे) करे तो उसकी अपने आत्मा के सदृश सेवा करो ॥९॥
Essence
जैसे पति अपनी स्त्री में गर्भ को धारण करके श्रेष्ठ सन्तानों को उत्पन्न करता है, वैसे ही विद्वान् लोग मनुष्यों की बुद्धि में विद्यासम्बन्धी गर्भ की स्थिति करके उत्तम व्यवहारों को उत्पन्न करें ॥९॥
Subject
फिर विद्वान् लोग क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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