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Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 8

62 Sukta
15 Mantra
3/27/8
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वा॒जी वाजे॑षु धीयतेऽध्व॒रेषु॒ प्र णी॑यते। विप्रो॑ य॒ज्ञस्य॒ साध॑नः॥

वा॒जी । वाजे॑षु । धी॒य॒ते॒ । अ॒ध्व॒रेषु॑ । प्र । नी॒य॒ते॒ । विप्रः॑ । य॒ज्ञस्य॑ । साध॑नः ॥

Mantra without Swara
वाजी वाजेषु धीयतेऽध्वरेषु प्र णीयते। विप्रो यज्ञस्य साधनः॥

वाजी। वाजेषु। धीयते। अध्वरेषु। प्र। नीयते। विप्रः। यज्ञस्य। साधनः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 29 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे धर्म आदि की जिज्ञासा करनेवाले पुरुषो ! जैसे ऋत्विजों से (वाजेषु) विज्ञान और क्रियास्वरूप (अध्वरेषु) मित्रता आदि गुणयुक्त व्यवहारों वा यज्ञों में (यज्ञस्य) उत्तम व्यवहार का (साधनः) सिद्धिकर्त्ता (वाजी) वेगयुक्त अग्नि (धीयते) धारण किया जाता है वैसे (विप्रः) बुद्धिमान् (प्र) (नीयते) प्राप्त किया जाता है ॥८॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे अग्निहोत्र आदि क्रियास्वरूप यज्ञों में मुख्यभाव से अग्नि का आश्रय किया जाता है, वैसे ही विद्या विनय और उत्तम शिक्षा के व्यवहारों में विद्वान् का आश्रय करना चाहिये ॥८॥
Subject
फिर विद्वानों से भिन्न जन क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।