Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 7

62 Sukta
15 Mantra
3/27/7
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
होता॑ दे॒वो अम॑र्त्यः पु॒रस्ता॑देति मा॒यया॑। वि॒दथा॑नि प्रचो॒दय॑न्॥

होता॑ । दे॒वः । अम॑र्त्यः । पु॒रस्ता॑त् । ए॒ति॒ । मा॒यया॑ । वि॒दथा॑नि । प्र॒ऽचो॒दय॑न् ॥

Mantra without Swara
होता देवो अमर्त्यः पुरस्तादेति मायया। विदथानि प्रचोदयन्॥

होता। देवः। अमर्त्यः। पुरस्तात्। एति। मायया। विदथानि। प्रऽचोदयन्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 29 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे धर्म आदि को जानने की इच्छा करनेवाले पुरुषो ! जैसे (अमर्त्यः) मरणधर्म से रहित (होता) देनेवाला (देवः) उत्तम गुण कर्म स्वभावयुक्त पुरुष (पुरस्तात्) पहिले से (मायया) उत्तम बुद्धि के साथ (विदथानि) विज्ञानों का (प्रचोदयन्) प्रचार करता हुआ आप लोगों को (एति) प्राप्त होता है, वैसे उसको आप लोग भी प्राप्त होइये ॥७॥
Essence
हे विद्यार्थी जनो ! जो अध्यापक पुरुष आप लोगों के लिये कपट त्याग के विद्या आदि उत्तम गुणों को देकर उत्तम शिक्षा देवे, उसकी आप लोग भी अपने आत्मा के तुल्य सेवा करो ॥७॥
Subject
फिर विद्यार्थी क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।