Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 2

62 Sukta
15 Mantra
3/27/2
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ईळे॑ अ॒ग्निं वि॑प॒श्चितं॑ गि॒रा य॒ज्ञस्य॒ साध॑नम्। श्रु॒ष्टी॒वानं॑ धि॒तावा॑नम्॥

ईळे॑ । अ॒ग्निम् । वि॒पः॒ऽचित॑म् । गि॒रा । य॒ज्ञस्य॑ । साध॑नम् । श्रु॒ष्टी॒ऽवान॑म् । धि॒तऽवा॑नम् ॥

Mantra without Swara
ईळे अग्निं विपश्चितं गिरा यज्ञस्य साधनम्। श्रुष्टीवानं धितावानम्॥

ईळे। अग्निम्। विपःऽचितम्। गिरा। यज्ञस्य। साधनम्। श्रुष्टीऽवानम्। धितऽवानम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 28 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे मैं (गिरा) वाणी से (यज्ञस्य) अहिंसारूप यज्ञ की (साधनम्) सिद्धि करने (श्रुष्टीवानम्) शीघ्र चलने वा चलानेवाले (धितावानम्) पदार्थों के धारणकर्त्ता (अग्निम्) अग्नि के सदृश तेजस्वी (विपश्चितम्) पण्डित विद्वान् की (ईळे) स्तुति करता हूँ, वैसे आप लोग भी स्तुति करें ॥२॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे किसी पदार्थ के जोड़ने आदि व्यवहार की सिद्धि के लिये अग्नि मुख्योपकारी है, वैसे ही धर्म, अर्थ, काम और विद्या की प्राप्ति के लिये विद्वान् जन मुख्य हैं, ऐसा जानना चाहिये ॥२॥
Subject
फिर अग्नि से क्या सिद्ध होता है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।