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Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 14

62 Sukta
15 Mantra
3/27/14
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वृषो॑ अ॒ग्निः समि॑ध्य॒तेऽश्वो॒ न दे॑व॒वाह॑नः। तं ह॒विष्म॑न्त ईळते॥

वृषो॒ इति॑ । अ॒ग्निः । सम् । इ॒ध्य॒ते॒ । अश्वः॑ । न । दे॒व॒ऽवाह॑नः । तम् । ह॒विष्म॑न्तः । ई॒ळ॒ते॒ ॥

Mantra without Swara
वृषो अग्निः समिध्यतेऽश्वो न देववाहनः। तं हविष्मन्त ईळते॥

वृषो इति। अग्निः। सम्। इध्यते। अश्वः। न। देवऽवाहनः। तम्। हविष्मन्तः। ईळते॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 30 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
जो (वृषः) वृष्टिकर्त्ता (देववाहनः) उत्तम वेग आदि गुणों को प्राप्त करानेवाला (अग्निः) अग्नि (अश्वः) शीघ्र चलनेवाले घोड़े के (न) सदृश (सम्) (इध्यते) प्रकाशित किया जाता है (तम्) उसकी (हविष्मन्तः) बहुत शीघ्र ग्रहण करने योग्य वस्तुओं से युक्त पुरुष (ईळते) स्तुति करते हैं ॥१४॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे बल और वेग से युक्त घोड़े वाहन को शीघ्र ले चलते हैं, वैसे ही अग्नि को भी समझना चाहिये और जैसे इस अग्नि के गुणों को विद्वान् लोग जानते हैं, वैसे आप लोग भी जानिये ॥१४॥
Subject
फिर मनुष्य क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।