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Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 13

62 Sukta
15 Mantra
3/27/13
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ई॒ळेन्यो॑ नम॒स्य॑स्ति॒रस्तमां॑सि दर्श॒तः। सम॒ग्निरि॑ध्यते॒ वृषा॑॥

ई॒ळेन्यः॑ । न॒म॒स्यः॑ । ति॒रः । तमां॑सि । द॒र्श॒तः । सम् । अ॒ग्निः । इ॒ध्य॒ते॒ । वृषा॑ ॥

Mantra without Swara
ईळेन्यो नमस्यस्तिरस्तमांसि दर्शतः। समग्निरिध्यते वृषा॥

ईळेन्यः। नमस्यः। तिरः। तमांसि। दर्शतः। सम्। अग्निः। इध्यते। वृषा॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 30 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (तमांसि) रात्रियों के (तिरः) तिरस्कार करनेवाले (अग्निः) अग्नि के सदृश प्रकाशमान (वृषा) वृष्टिकर्त्ता (दर्शतः) देखने (ईडेन्यः) स्तुति करने और (नमस्यः) सत्कार करने योग्य पुरुष (सम्) उत्तम प्रकार (इध्यते) प्रकाशित किया जाता है, उसका आप निरन्तर आदर करो ॥१३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे सूर्य्य अन्धकार को दूर कर प्रकाश उत्पन्न करता है, वैसे ही यथार्थवक्ता विद्वान् लोग अविद्या का नाश और विद्या का प्रकाश करते हैं ॥१३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।