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Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 11

62 Sukta
15 Mantra
3/27/11
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒ग्निं य॒न्तुर॑म॒प्तुर॑मृ॒तस्य॒ योगे॑ व॒नुषः॑। विप्रा॒ वाजैः॒ समि॑न्धते॥

अ॒ग्निम् । य॒न्तुर॑म् । अ॒प्ऽतुर॑म् । ऋ॒तस्य॑ । योगे॑ । व॒नुषः॑ । विप्राः॑ । वाजैः॑ । सम् । इ॒न्ध॒ते॒ ॥

Mantra without Swara
अग्निं यन्तुरमप्तुरमृतस्य योगे वनुषः। विप्रा वाजैः समिन्धते॥

अग्निम्। यन्तुरम्। अप्ऽतुरम्। ऋतस्य। योगे। वनुषः। विप्राः। वाजैः। सम्। इन्धते॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 30 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (वनुषः) याचना करनेवाले (विप्राः) बुद्धिमान् जन (ऋतस्य) सत्य के (योगे) योग में (वाजैः) विज्ञान आदिकों से (यन्तुरम्) प्राप्तिकारक (अप्तुरम्) प्राण वा जलों की प्रेरणाकर्त्ता (अग्निम्) अग्नि के सदृश तेजस्वी को (सम्) (इन्धते) उत्तम प्रकार प्रदीप्त करें, वैसे ही सम्पूर्ण जनों से विद्या प्रकाश करने योग्य है ॥११॥
Essence
जिस समय विद्वान् पुरुषों का सङ्ग होवे, उस समय उत्तम विज्ञान ही की प्रश्न-उत्तरों से याचना करनी चाहिये, इससे अधिक लाभ और न समझना चाहिये ॥११॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।