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Rigveda Mandal 3 / Sukta 27 / Mantra 10

62 Sukta
15 Mantra
3/27/10
Devata- अग्निः Rishi- विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
नि त्वा॑ दधे॒ वरे॑ण्यं॒ दक्ष॑स्ये॒ळा स॑हस्कृत। अग्ने॑ सुदी॒तिमु॒शिज॑म्॥

नि । त्वा॒ । द॒धे॒ । वरे॑ण्यम् । दक्ष॑स्य । इ॒ळा । स॒हः॒ऽकृ॒त॒ । अग्ने॑ । सु॒ऽदी॒तिम् । उ॒शिज॑म् ॥

Mantra without Swara
नि त्वा दधे वरेण्यं दक्षस्येळा सहस्कृत। अग्ने सुदीतिमुशिजम्॥

नि। त्वा। दधे। वरेण्यम्। दक्षस्य। इळा। सहःऽकृत। अग्ने। सुऽदीतिम्। उशिजम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 29 Mantra » 5

Bhashya

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Meaning
हे (सहस्कृत) बलकारक (अग्ने) अग्नि के सदृश तेजयुक्त पुरुष ! जैसे मैं (इळा) उत्तम उपदेश वा उत्तम प्रकार संस्कारयुक्त अन्न आदि से (दक्षस्य) पराक्रम के (वरेण्यम्) स्वीकार करने योग्य (सुदीतिम्) उत्तम विज्ञान के प्रकाश से युक्त (उशिजम्) उत्तम गुणों के प्रचार की कामना करनेवाले (त्वा) आपको (नि) निश्चय से (दधे) धारण करूँ, वैसे ही आप मुझको विद्या का पात्र करो ॥१०॥
Essence
जैसे विद्यार्थी जन अध्यापक लोगों की इच्छा के अनुसार कर्म्मों को कर प्रसन्न रखते हैं, वैसे ही अध्यापक लोग विद्यार्थियों की इच्छा के अनुकूल उत्तम गुणों को देकर प्रसन्न करें ॥१०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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