Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 26 / Mantra 1

62 Sukta
9 Mantra
3/26/1
Devata- वैश्वानरः Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
वै॒श्वा॒न॒रं मन॑सा॒ग्निं नि॒चाय्या॑ ह॒विष्म॑न्तो अनुष॒त्यं स्व॒र्विद॑म्। सु॒दानुं॑ दे॒वं र॑थि॒रं व॑सू॒यवो॑ गी॒र्भी र॒ण्वं कु॑शि॒कासो॑ हवामहे॥

वै॒श्वा॒न॒रम् । मन॑सा । अ॒ग्निम् । नि॒ऽचाय्य॑ । ह॒विष्म॑न्तः । अ॒नु॒ऽस॒त्यम् । स्वः॒ऽविद॑म् । सु॒ऽदानु॑म् । दे॒वम् । र॒थि॒रम् । व॒सु॒ऽयवः॑ । गीः॒ऽभिः । र॒ण्वम् । कु॒शि॒कासः॑ । ह॒वा॒म॒हे॒ ॥

Mantra without Swara
वैश्वानरं मनसाग्निं निचाय्या हविष्मन्तो अनुषत्यं स्वर्विदम्। सुदानुं देवं रथिरं वसूयवो गीर्भी रण्वं कुशिकासो हवामहे॥

वैश्वानरम्। मनसा। अग्निम्। निऽचाय्य। हविष्मन्तः। अनुऽसत्यम्। स्वःऽविदम्। सुऽदानुम्। देवम्। रथिरम्। वसुऽयवः। गीःऽभिः। रण्वम्। कुशिकासः। हवामहे॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 26 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (कुशिकासः) उपदेशक जन (हविष्मन्तः) देने योग्य वस्तुओं से युक्त (वसुयवः) धन इकट्ठा करने में तत्पर हम लोग (मनसा) विज्ञान से (निचाय्य) निश्चय कराकर (स्वर्विदम्) धन की प्राप्ति करानेवाले (रण्वम्) शब्द करते हुए (रथिरम्) सुन्दर वाहनों से युक्त (अनुषत्यम्) सत्य के अनुकूल (सुदानुम्) उत्तम पदार्थों के देनेवाले (देवम्) प्रकाशकारक (वैश्वानरम्) सम्पूर्ण मनुष्यों के प्रकाशकर्त्ता (अग्निम्) अग्नि को (हवामहे) ग्रहण करते हैं, वैसे आप लोग भी इस अग्नि का (गीर्भिः) वाणियों से स्वीकार करें ॥१॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे मनुष्य अग्नि के गुणकर्मस्वभावों का निश्चय करके कार्य्यों को सिद्ध करते हैं, वैसे ही पृथिवी आदि पदार्थों के गुणकर्मस्वभावों के निश्चय और उपकार से कार्य्यों को सिद्ध करो ॥१॥
Subject
अब नव ऋचावाले छब्बीसवें सूक्त का प्रारम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में अग्नि आदि से विद्वान् क्या सिद्ध करें, इस विषय को कहते हैं।