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Rigveda Mandal 3 / Sukta 24 / Mantra 4

62 Sukta
5 Mantra
3/24/4
Devata- अग्निः Rishi- गोपवन आत्रेयः सप्तवध्रिर्वा Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अग्ने॒ विश्वे॑भिर॒ग्निभि॑र्दे॒वेभि॑र्महया॒ गिरः॑। य॒ज्ञेषु॒ य उ॑ चा॒यवः॑॥

अग्ने॑ । विश्वे॑भिः । अ॒ग्निऽभिः॑ । दे॒वेभिः॑ । म॒ह॒य॒ । गिरः॑ । य॒ज्ञेषु॑ । ये । ऊँ॒ इति॑ । चा॒यवः॑ ॥

Mantra without Swara
अग्ने विश्वेभिरग्निभिर्देवेभिर्महया गिरः। यज्ञेषु य उ चायवः॥

अग्ने। विश्वेभिः। अग्निऽभिः। देवेभिः। महय। गिरः। यज्ञेषु। ये। ऊँ इति। चायवः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 24 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वन् पुरुष ! (ये) जो पुरुष (यज्ञेषु) संगति के योग्य व्यवहारों में (चायवः) सत्कार योग्य हों उनका ही (अग्निभिः) अग्नियों के सदृश तेजयुक्त (विश्वेभिः) सम्पूर्ण (देवेभिः) श्रेष्ठ गुण कर्म स्वभावयुक्त विद्वानों के साथ (महय) सत्कार करो (उ) और उन्हीं लोगों की (गिरः) उत्तम प्रकार शिक्षायुक्त वाणियों का प्रमाण मानो ॥४॥
Essence
जो राजपुरुष इस संसार में उत्तम कार्य्यों के कर्त्ता हों, उनका सब लोग सत्कार करें और जो दुष्ट कर्म करते हों, उनका अपमान करें ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।