Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 23 / Mantra 2

62 Sukta
5 Mantra
3/23/2
Devata- अग्निः Rishi- देवश्रवा देववातश्च भारती Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अम॑न्थिष्टां॒ भार॑ता रे॒वद॒ग्निं दे॒वश्र॑वा दे॒ववा॑तः सु॒दक्ष॑म्। अग्ने॒ वि प॑श्य बृह॒ताभि रा॒येषां नो॑ ने॒ता भ॑वता॒दनु॒ द्यून्॥

अम॑न्थिष्टाम् । भार॑ता । रे॒वत् । अ॒ग्निम् । दे॒वऽश्र॑वाः । दे॒वऽवा॑तः । सु॒ऽदक्ष॑म् । अग्ने॑ । वि । प॒श्य॒ । बृ॒ह॒ता । अ॒भि । रा॒या । इ॒षाम् । नः॒ । ने॒ता । भ॒व॒ता॒त् । अनु॑ । द्यून् ॥

Mantra without Swara
अमन्थिष्टां भारता रेवदग्निं देवश्रवा देववातः सुदक्षम्। अग्ने वि पश्य बृहताभि रायेषां नो नेता भवतादनु द्यून्॥

अमन्थिष्टाम्। भारता। रेवत्। अग्निम्। देवऽश्रवाः। देवऽवातः। सुऽदक्षम्। अग्ने। वि। पश्य। बृहता। अभि। राया। इषाम्। नः। नेता। भवतात्। अनु। द्यून्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 23 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) अग्नि के सदृश प्रकाशयुक्त ! जैसे (भारता) धारणकर्त्ता और पालनकर्त्ता पुरुष (सुदक्षम्) श्रेष्ठ बल (अग्निम्) अग्नि का (अमन्थिष्टाम्) मन्थन करो वैसे (देवश्रवाः) विद्वानों के वचन श्रोता (देववातः) श्रेष्ठ प्रेरणाकारक से प्रेरित (अनु, द्यून्) अनुकूल दिवस (रेवत्) धन के तुल्य अग्नि का मन्थन करें जो (नः) हम लोगों के लिये (नेता) सुमार्ग में अग्रणी (भवतात्) होवे वह आप (बृहता) बड़े (राया) धन से (इषाम्) अन्न आदिकों के मध्य में (अभि) (वि, पश्य) सब प्रकार कृपादृष्टि से देखिये ॥२॥
Essence
हे मनुष्यो ! जैसे शिल्पविद्या के पढ़ने-पढ़ानेवाले लोग पदार्थों के क्रयविक्रय से धनवान् होते हैं, वैसे ही आप लोग भी होइये ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।