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Rigveda Mandal 3 / Sukta 20 / Mantra 2

62 Sukta
5 Mantra
3/20/2
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- गाथी कौशिकः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अग्ने॒ त्री ते॒ वाजि॑ना॒ त्री ष॒धस्था॑ ति॒स्रस्ते॑ जि॒ह्वा ऋ॑तजात पू॒र्वीः। ति॒स्र उ॑ ते त॒न्वो॑ दे॒ववा॑ता॒स्ताभि॑र्नः पाहि॒ गिरो॒ अप्र॑युच्छन्॥

अग्ने॑ । त्री । ते॒ । वा॒जि॑ना॑ । त्री । ष॒धऽस्था॑ । ति॒स्रः । ते॒ । जि॒ह्वाः । ऋ॒त॒ऽजा॒त॒ । पू॒र्वीः । ति॒स्रः । ऊँ॒ इति॑ । ते॒ । त॒न्वः॑ । दे॒वऽवा॑ताः । ताभिः॑ । नः॒ । पा॒हि॒ । गिरः॑ । अप्र॑ऽयुच्छन् ॥

Mantra without Swara
अग्ने त्री ते वाजिना त्री षधस्था तिस्रस्ते जिह्वा ऋतजात पूर्वीः। तिस्र उ ते तन्वो देववातास्ताभिर्नः पाहि गिरो अप्रयुच्छन्॥

अग्ने। त्री। ते। वाजिना। त्री। षधऽस्था। तिस्रः। ते। जिह्वाः। ऋतऽजात। पूर्वीः। तिस्रः। ऊँ इति। ते। तन्वः। देवऽवाताः। ताभिः। नः। पाहि। गिरः। अप्रऽयुच्छन्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 20 Mantra » 2

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Meaning
हे (ऋतजात) सत्य आचरण करने में प्रसिद्ध (अग्ने) अग्नि के सदृश प्रकाशस्वरूप विद्वान् पुरुष ! (ते) आपके (त्री) तीन (वाजिना) ज्ञान गमन और प्राप्तिरूप (त्री) तीन (सधस्था) तुल्य स्थानवाले जन्मादि (ते) आपकी (तिस्रः) तीन प्रकार वाली (जिह्वा) वाणियाँ (पूर्वीः) प्राचीन (उ) और (ते) आपके (तिस्रः) तीन (तन्वः) शरीर सम्बन्धी (देववाताः) विद्वानों के साथ संवाद करने में उपकारक (गिरः) वचन हैं उनसे (अप्रयुच्छन्) अहंकार त्यागी आप (नः) हम लोगों की (पाहि) रक्षा करो ॥२॥
Essence
हे मनुष्यो ! आप लोग ब्रह्मचर्य्य अध्ययन और विचार से तीन कर्म करके तीन जन्म स्थान और नामों में कृतकृत्य अर्थात् जन्म सफल करो, पढ़ाने तथा उपदेश से सबकी रक्षा करो और आप स्वयं प्रमादरहित होकर अन्य लोगों को वैसा ही करो ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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