Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 16 / Mantra 5

62 Sukta
6 Mantra
3/16/5
Devata- अग्निः Rishi- उत्कीलः कात्यः Chhanda- भुरिगनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
मा नो॑ अ॒ग्नेऽम॑तये॒ मावीर॑तायै रीरधः। मागोता॑यै सहसस्पुत्र॒ मा नि॒देऽप॒ द्वेषां॒स्या कृ॑धि॥

मा । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । अम॑तये । मा । अ॒वीर॑तायै । री॒र॒धः॒ । मा । अ॒गोता॑यै । स॒ह॒सः॒ । पु॒त्र॒ । मा । नि॒दे । अप॑ । द्वेषां॑सि । आ । कृ॒धि॒ ॥

Mantra without Swara
मा नो अग्नेऽमतये मावीरतायै रीरधः। मागोतायै सहसस्पुत्र मा निदेऽप द्वेषांस्या कृधि॥

मा। नः। अग्ने। अमतये। मा। अवीरतायै। रीरधः। मा। अगोतायै। सहसः। पुत्र। मा। निदे। अप। द्वेषांसि। आ। कृधि॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 16 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (सहसः) बल के (पुत्र) पालक (अग्ने) विद्वन् पुरुष ! आप (नः) हम लोगों की (अमतये) विपरीत बुद्धि के लिये (मा) नहीं (रीरधः) वश में करो तथा (अवीरतायै) कायरता के लिये (मा) नहीं वशीभूत करो (अगोतायै) इन्द्रियविकारता के लिये (मा) नहीं वशीभूत करो (निदे) निन्दक पुरुष के लिये (द्वेषांसि) द्वेष भावों को (मा) नहीं (अप) अलग करने में (आ) (कृधि) सब प्रकार कीजिये ॥५॥
Essence
ज्ञान सुख की इच्छा करनेवाले पुरुषों को चाहिये कि विद्वानों के समीप प्राप्त होकर बुद्धि वीरता जितेन्द्रियता विद्या उत्तम शिक्षा धर्म और ब्रह्मज्ञान की प्रार्थना करें तथा निन्दा आदि दोष और निन्दक पुरुषों का सङ्ग त्याग के सभ्यता ग्रहण करें ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।