Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 15 / Mantra 5

62 Sukta
7 Mantra
3/15/5
Devata- अग्निः Rishi- उत्कीलः कात्यः Chhanda- विराट्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अच्छि॑द्रा॒ शर्म॑ जरितः पु॒रूणि॑ दे॒वाँ अच्छा॒ दीद्या॑नः सुमे॒धाः। रथो॒ न सस्नि॑र॒भि व॑क्षि॒ वाज॒मग्ने॒ त्वं रोद॑सी नः सु॒मेके॑॥

अच्छि॑द्रा । शर्म॑ । ज॒रि॒त॒रिति॑ । पु॒रूणि॑ । दे॒वान् । अच्छ॑ । दीद्या॑नः । सु॒ऽमे॒धाः । रथः॑ । न । सस्निः॑ । अ॒भि । व॒क्षि॒ । वाज॑म् । अ॒ग्ने॒ । त्वम् । रोद॑सी॒ इति॑ । नः॒ । सु॒मेके॒ इति॑ सु॒ऽमेके॑ ॥

Mantra without Swara
अच्छिद्रा शर्म जरितः पुरूणि देवाँ अच्छा दीद्यानः सुमेधाः। रथो न सस्निरभि वक्षि वाजमग्ने त्वं रोदसी नः सुमेके॥

अच्छिद्रा। शर्म। जरितरिति। पुरूणि। देवान्। अच्छ। दीद्यानः। सुऽमेधाः। रथः। न। सस्निः। अभि। वक्षि। वाजम्। अग्ने। त्वम्। रोदसी इति। नः। सुमेके इति सुऽमेके॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 15 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) अग्नि के सदृश प्रतापी ! (त्वम्) आप जैसे अग्नि (सुमेके) अच्छे प्रकार फैलाये गये (रोदसी) अन्तरिक्ष पृथिवी को प्रकाशित करता है, उसी प्रकार (नः) हम लोगों के (दीद्यानः) प्रकाशयुक्त वा प्रकाशक (सुमेधाः) श्रेष्ठ बुद्धिमान् और (सस्निः) सुडौल (रथः) उत्तम रथ के (न) सदृश हम लोगों के लिये (अभि) सन्मुख (वाजम्) विज्ञान को (वक्षि) कहिये हे (जरितः) सत्य गुणों की स्तुतिकर्ता विद्वान् पुरुष आप (अच्छिद्रा) अति पुष्ट (पुरूणि) बहुत (शर्म) गृह और (देवान्) विद्वान् वा उत्तम गुणों से प्रसन्नतापूर्वक (अच्छ) उत्तम प्रकार संयुक्त कीजिये ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे सुडौल बने हुए और दृढ रथ से अभिवाञ्छित स्थानों को शीघ्र पहुँचते हैं, वैसे ही जो पुरुष आलस्य त्याग कर पुरुषार्थी हैं, वे उत्तम स्थानों की कामना करते हुए विद्वानों के सङ्ग द्वारा श्रेष्ठगुणों से संयुक्त होकर अन्य जनों के लिये भी उपदेश देते हैं, वे पुरुष उत्तम प्रकार सुख भोगते हैं ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।