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Rigveda Mandal 3 / Sukta 14 / Mantra 2

62 Sukta
7 Mantra
3/14/2
Devata- अग्निः Rishi- ऋषभो वैश्वामित्रः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अया॑मि ते॒ नम॑उक्तिं जुषस्व॒ ऋता॑व॒स्तुभ्यं॒ चेत॑ते सहस्वः। वि॒द्वाँ आ व॑क्षि वि॒दुषो॒ नि ष॑त्सि॒ मध्य॒ आ ब॒र्हिरू॒तये॑ यजत्र॥

अया॑मि । ते॒ । नमः॑ऽउक्ति॑म् । जु॒ष॒स्व॒ । ऋत॑ऽवः । तुभ्य॑म् । चेत॑ते । स॒ह॒स्वः॒ । वि॒द्वान् । आ । व॒क्षि॒ । वि॒दुषः॑ । नि । ष॒त्सि॒ । मध्ये॑ । आ । ब॒र्हिः । ऊ॒तये॑ । य॒ज॒त्र॒ ॥

Mantra without Swara
अयामि ते नमउक्तिं जुषस्व ऋतावस्तुभ्यं चेतते सहस्वः। विद्वाँ आ वक्षि विदुषो नि षत्सि मध्य आ बर्हिरूतये यजत्र॥

अयामि। ते। नमःऽउक्तिम्। जुषस्व। ऋतऽवः। तुभ्यम्। चेतते। सहस्वः। विद्वान्। आ। वक्षि। विदुषः। नि। षत्सि। मध्ये। आ। बर्हिः। ऊतये। यजत्र॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 14 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (ऋतावः) सत्यप्रकाशकशील ! मैं (ते) आपके (नमउक्तिम्) नमस्कारों के वचन को (अयामि) प्राप्त होता हूँ (जुषस्व) उसका आप आदरसहित ग्रहण कीजिये। हे (सहस्वः) अतिबलयुक्त वा संपूर्ण विद्या जाननेवाले जो (विद्वान्) विद्वान् ! आप (विदुषः) विद्वानों को (आ) (वक्षि) सबप्रकार उपदेश देते हो, ऐसे आपके साथ विद्वानों को प्राप्त होता हूँ। हे (यजत्र) पूजन करने योग्य ! जो आप (ऊतये) रक्षा आदि के लिये (बर्हिः) अन्तरिक्ष के (मध्ये) मध्य में (आ) (नि) अच्छे प्रकार निश्चित (सत्सि) विराजो उस (चेतते) बोध देनेवाले (तुभ्यम्) आपके लिये नमस्काररूप वचन करता हूँ ॥२॥
Essence
जैसे विद्यार्थी लोग नमस्कार आदि सेवा से अध्यापकों को प्रसन्न करें, वैसे अध्यापक लोग उत्तमशिक्षारूप विद्यादान से विद्यार्थियों को प्रसन्न सन्तुष्ट करें ॥२॥
Subject
अब पढ़ने-पढ़ाने रूप विषय को अगले मन्त्र में कहा है।