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Rigveda Mandal 3 / Sukta 13 / Mantra 6

62 Sukta
7 Mantra
3/13/6
Devata- अग्निः Rishi- ऋषभो वैश्वामित्रः Chhanda- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
उ॒त नो॒ ब्रह्म॑न्नविष उ॒क्थेषु॑ देव॒हूत॑मः। शं नः॑ शोचा म॒रुद्वृ॒धोऽग्ने॑ सहस्र॒सात॑मः॥

उ॒त । नः॒ । ब्रह्म॑न् । अ॒वि॒षः॒ । उ॒क्थेषु॑ । दे॒व॒ऽहूत॑मः । शम् । नः॒ । शो॒च॒ । म॒रुत्ऽवृ॑धः । अग्ने॑ । स॒ह॒स्र॒ऽसात॑मः ॥

Mantra without Swara
उत नो ब्रह्मन्नविष उक्थेषु देवहूतमः। शं नः शोचा मरुद्वृधोऽग्ने सहस्रसातमः॥

उत। नः। ब्रह्मन्। अविषः। उक्थेषु। देवऽहूतमः। शम्। नः। शोच। मरुत्ऽवृधः। अग्ने। सहस्रऽसातमः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 13 Mantra » 6

Bhashya

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Meaning
हे (अग्ने) अग्नि के तुल्य कीर्त्ति से प्रकाशमान ! आप (ब्रह्मन्) धन और (उक्थेषु) प्रशंसनीय पदार्थों के निमित्त (नः) हमको (अविषः) संयुक्त कीजिये (उत) और (देवहूतमः) विद्वानों से अतिप्रशंसा को प्राप्त (सहस्रसातमः) असङ्ख्य उपदेश वा धनों को अत्यन्त देनेवाले आप (मरुद्वृधः) मनुष्यों से बढ़ते हुए (नः) हमारे (शम्) सुख का (शोच) विचार कीजिये वा सुख प्राप्त कीजिये ॥६॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि विद्वानों के शरण जाके प्रथम से ब्रह्मचर्य्य विद्या आदि का ग्रहण तदनन्तर धन ऐश्वर्य्य की वृद्धि के उपाय की प्रार्थना करें और फिर धन को प्राप्त होके उत्तम विद्यावान् पुरुषों और श्रेष्ठ मार्ग में खर्चें ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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