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Rigveda Mandal 3 / Sukta 12 / Mantra 8

62 Sukta
9 Mantra
3/12/8
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इन्द्रा॑ग्नी तवि॒षाणि॑ वां स॒धस्था॑नि॒ प्रयां॑सि च। यु॒वोर॒प्तूर्यं॑ हि॒तम्॥

इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । त॒वि॒षाणि॑ । वा॒म् । स॒धऽस्था॑नि । प्रयां॑सि । च॒ । यु॒वोः । अ॒प्ऽतूर्य॑म् । हि॒तम् ॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नी तविषाणि वां सधस्थानि प्रयांसि च। युवोरप्तूर्यं हितम्॥

इन्द्राग्नी इति। तविषाणि। वाम्। सधऽस्थानि। प्रयांसि। च। युवोः। अप्ऽतूर्यम्। हितम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 12 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्राग्नी) वायु बिजुली के सदृश ऐक्यमत से वर्त्तमान सेना और सेना के मुख्य अधिष्ठाता ! (वाम्) आप दोनों के (सधस्थानि) तुल्य स्थान में विद्यमान (प्रयांसि) कामना करने योग्य (तविषाणि) बल पराक्रम (च) और (युवोः) आपदोनों के (अप्तूर्य्यम्) कर्म करने के लिये शीघ्रता (हितम्) सुखसाधक हो ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो वायु और बिजुली के संयोग के समान परस्पर सेना और सेना के स्वामी प्रेमभाव से विरोध छोड़ के वर्त्ताव करें, तो संपूर्ण मनोरथ सिद्ध हों ॥८॥
Subject
फिर राजधर्म विषय को अगले मन्त्र में कहा है।