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Rigveda Mandal 3 / Sukta 12 / Mantra 6

62 Sukta
9 Mantra
3/12/6
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इन्द्रा॑ग्नी नव॒तिं पुरो॑ दा॒सप॑त्नीरधूनुतम्। सा॒कमेके॑न॒ कर्म॑णा॥

इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । न॒व॒तिम् । पुरः॑ । दा॒सऽप॑त्नीः । अ॒धू॒नु॒त॒म् । सा॒कम् । एके॑न । कर्म॑णा ॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नी नवतिं पुरो दासपत्नीरधूनुतम्। साकमेकेन कर्मणा॥

इन्द्राग्नी इति। नवतिम्। पुरः। दासऽपत्नीः। अधूनुतम्। साकम्। एकेन। कर्मणा॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 12 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
हे सभापति सेनापतियो ! जैसे (इन्द्राग्नी) वायु और अग्नि को (साकम्) एक साथ (एकेन) (कर्मणा) एक कर्म से (नवतिम्) नब्बे संख्यायुक्त (पुरः) पालन करनेवाली (दासपत्नीः) शत्रुओं को युद्ध में दूर फेंकनेवाले पुरुषों की स्त्रियों के तुल्य वर्त्तमान सूर्य्य की किरणें (अधूनुतम्) कंपाती हैं वैसे आप दोनों सेना आदिकों से शत्रुओं को कम्पावें ॥६॥
Essence
सभाध्यक्षादि मनुष्यों को चाहिये कि परस्पर एक सम्मति से दुष्ट पुरुषों को उत्तम स्थानों से दूर कर और श्रेष्ठ पुरुषों का सत्कार करके धर्म्मपूर्वक व्यवहार से राज्यप्रबन्ध करें ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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