Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 12 / Mantra 5

62 Sukta
9 Mantra
3/12/5
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र वा॑मर्चन्त्यु॒क्थिनो॑ नीथा॒विदो॑ जरि॒तारः॑। इन्द्रा॑ग्नी॒ इष॒ आ वृ॑णे॥

प्र । वा॒म् । अ॒र्च॒न्ति॒ । उ॒क्थिनः॑ । नी॒थ॒ऽविदः॑ । ज॒रि॒तारः॑ । इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । इषः॑ । आ । वृ॒णे॒ ॥

Mantra without Swara
प्र वामर्चन्त्युक्थिनो नीथाविदो जरितारः। इन्द्राग्नी इष आ वृणे॥

प्र। वाम्। अर्चन्ति। उक्थिनः। नीथऽविदः। जरितारः। इन्द्राग्नी इति। इषः। आ। वृणे॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 11 Mantra » 5

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (इन्द्राग्नी) बिजुली और सूर्य्य के सदृश प्रकाश सहित विद्यमान सभापति सेनापतियो ! जो (नीथाविदः) नम्रतायुक्त (उक्थिनः) उत्तम गुणों की प्रशंसा करने तथा (जरितारः) ईश्वर की स्तुति करनेवाले (वाम्) तुम दोनों को (प्र, अर्चन्ति) विशेष सत्कार करते हैं उनसे मैं (इषः) अन्न आदि को (आ, वृणे) सब ओर से प्राप्त होऊँ ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो पुरुष पृथिवी आदि पदार्थों के गुण कर्म स्वभावों को जानते हैं, वे ही युद्ध और न्यायाचरण कर सकते हैं ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.