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Rigveda Mandal 3 / Sukta 12 / Mantra 2

62 Sukta
9 Mantra
3/12/2
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इन्द्रा॑ग्नी जरि॒तुः सचा॑ य॒ज्ञो जि॑गाति॒ चेत॑नः। अ॒या पा॑तमि॒मं सु॒तम्॥

इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । ज॒रि॒तुः । सचा॑ । य॒ज्ञः । जि॒गा॒ति॒ । चेत॑नः । अ॒या । पा॒त॒म् । इ॒मम् । सु॒तम् ॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नी जरितुः सचा यज्ञो जिगाति चेतनः। अया पातमिमं सुतम्॥

इन्द्राग्नी इति। जरितुः। सचा। यज्ञः। जिगाति। चेतनः। अया। पातम्। इमम्। सुतम्॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 11 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्राग्नी) धन और विद्यायुक्त पुरुषो! जो (चेतनः) उत्तम रीति से जाननेवाला (यज्ञः) पूजा करने योग्य पुरुष आप दोनों के (जिगाति) शरण को प्राप्त होवे, वे दोनों आप (जरितुः) स्तुतिकर्ता पुरुष के (सचा) सम्बन्धी हुए (अया) इस विद्या सुशिक्षा सहित वाणी से (इमम्) इस वर्त्तमान (सुतम्) उत्पन्न संसार को (पातम्) पालो ॥२॥
Essence
हे अध्यापक और विद्योपदेशक लोगो ! जो पुरुष विद्या के उपदेश ग्रहण करने के लिये आप लोगों के शरण आवें, उनकी जैसे वायु सूर्य्य जगत् की रक्षा करते हैं, वैसे निरन्तर पालना करो ॥२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।