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Rigveda Mandal 3 / Sukta 12 / Mantra 1

62 Sukta
9 Mantra
3/12/1
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इन्द्रा॑ग्नी॒ आ ग॑तं सु॒तं गी॒र्भिर्नभो॒ वरे॑ण्यम्। अ॒स्य पा॑तं धि॒येषि॒ता॥

इन्द्रा॑ग्नी॒ इति॑ । आ । ग॑तम् । सु॒तम् । गीः॒ऽभिः । नभः॑ । वरे॑ण्यम् । अ॒स्य । पा॒त॒म् । धि॒या । इ॒षि॒ता ॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नी आ गतं सुतं गीर्भिर्नभो वरेण्यम्। अस्य पातं धियेषिता॥

इन्द्राग्नी इति। आ। गतम्। सुतम्। गीःऽभिः। नभः। वरेण्यम्। अस्य। पातम्। धिया। इषिता॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 11 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे विद्या पढ़ाने और उपदेश देनेवाले पुरुषो ! आप दोनों (इन्द्राग्नी) वायु और बिजुली के सदृश (अस्य) इस संसार में वर्त्तमान होकर (इषिता) बोध देते हुए (गीर्भिः) उत्तम शिक्षाओं से पूरित वाणियों के सहित (धिया) श्रेष्ठ बुद्धि से (नभः) अन्तरिक्ष नामक अवकाश की ओर (वरेण्यम्) स्वीकार करने योग्य (सुतम्) विद्या से उपार्जित धन से युक्त पुत्र वा शिष्य की (पातम्) रक्षा कीजिये और (आ, गतम्) विद्या के प्रचार के लिये आइये ॥१॥
Essence
हे अध्यापक और उपदेशक पुरुषों ! जैसे वायु और सूर्य्य सम्पूर्ण जगत् के रक्षाकारक हैं, वैसे ही विद्या और उत्तम शिक्षा से सम्पूर्ण जगत् के रक्षक हूजिये ॥१॥
Subject
अब नव ऋचावाले बारहवें सूक्त का आरम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में अध्यापक और उपदेशक का विषय कहते हैं।