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Rigveda Mandal 3 / Sukta 11 / Mantra 8

62 Sukta
9 Mantra
3/11/8
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
परि॒ विश्वा॑नि॒ सुधि॑ता॒ग्नेर॑श्याम॒ मन्म॑भिः। विप्रा॑सो जा॒तवे॑दसः॥

परि॑ । विश्वा॑नि । सुऽधि॑ता । अ॒ग्नेः । अ॒श्या॒म॒ । मन्म॑ऽभिः । विप्रा॑सः । जा॒तऽवे॑दसः ॥

Mantra without Swara
परि विश्वानि सुधिताग्नेरश्याम मन्मभिः। विप्रासो जातवेदसः॥

परि। विश्वानि। सुऽधिता। अग्नेः। अश्याम। मन्मऽभिः। विप्रासः। जातऽवेदसः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 3

Bhashya

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Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (जातवेदसः) विद्वान् हुए (विप्रासः) बुद्धिमान् हम लोग (मन्मभिः) विज्ञान विशेषों के सहित (अग्नेः) अग्नि के सदृश (विश्वानि) सम्पूर्ण (सुधिता) उत्तम प्रकार धारण किये शास्त्रों को (परि) सब ओर से (अश्याम) प्राप्त हों, वैसे ही आप लोग भी प्राप्त हूजिये ॥८॥
Essence
विद्वान् मनुष्यों को चाहिये कि जैसे बुद्धिमान् विद्वान् सृष्टि और आत्मा की विद्या ग्रहण के लिये प्रयत्न करते हैं, वैसे ही विद्यावृद्धि के लिये प्रयत्न करें ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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