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Rigveda Mandal 3 / Sukta 11 / Mantra 7

62 Sukta
9 Mantra
3/11/7
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒भि प्रयां॑सि॒ वाह॑सा दा॒श्वाँ अ॑श्नोति॒ मर्त्यः॑। क्षयं॑ पाव॒कशो॑चिषः॥

अ॒भि । प्रयां॑सि । वाह॑सा । दा॒श्वान् । अ॒श्नो॒ति॒ । मर्त्यः॑ । क्षय॑म् । पा॒व॒कऽशो॑चिषः ॥

Mantra without Swara
अभि प्रयांसि वाहसा दाश्वाँ अश्नोति मर्त्यः। क्षयं पावकशोचिषः॥

अभि। प्रयांसि। वाहसा। दाश्वान्। अश्नोति। मर्त्यः। क्षयम्। पावकऽशोचिषः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
जो (दाश्वान्) देनेवाला (मर्त्यः) मनुष्य (पावकशोचिषः) अग्नि की दीप्ति के सदृश दीप्तियुक्त विद्वान् पुरुष के (क्षयम्) विद्यास्थान को (अश्नोति) प्राप्त होता वह (वाहसा) उत्तम पदवी को प्राप्त होने से (प्रयांसि) कामना अभिलाषा के योग्य अन्न आदि को (अभि) प्राप्त होता है ॥७॥
Essence
जब मनुष्य विद्वानों की विद्यापदवी को प्राप्त होते हैं, तब ही उनके मनोरथ पूर्ण होते हैं ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।