Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 11 / Mantra 6

62 Sukta
9 Mantra
3/11/6
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सा॒ह्वान्विश्वा॑ अभि॒युजः॒ क्रतु॑र्दे॒वाना॒ममृ॑क्तः। अ॒ग्निस्तु॒विश्र॑वस्तमः॥

सा॒ह्वान् । विश्वाः॑ । अ॒भि॒ऽयुजः॑ । क्रतुः॑ । दे॒वाना॑म् । अमृ॑क्तः । अ॒ग्निः । तु॒विश्र॑वःऽतमः ॥

Mantra without Swara
साह्वान्विश्वा अभियुजः क्रतुर्देवानाममृक्तः। अग्निस्तुविश्रवस्तमः॥

साह्वान्। विश्वाः। अभिऽयुजः। क्रतुः। देवानाम्। अमृक्तः। अग्निः। तुविश्रवःऽतमः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 10 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जो (अमृक्तः) जो कि औरों से न मारा जा सके (साह्वान्) क्रोधरहित (क्रतुः) बुद्धिमान् और (अग्निः) अग्नि के सदृश शुद्धस्वभाव वाला (तुविश्रवस्तमः) अतिशय कर बहुत शास्त्रों को जिसने सुना हो (देवानाम्) पण्डितों के बीच में (विश्वाः) संपूर्ण (अभियुजः) अपने अनुकूल व्यवहार करनेवाली प्रजाओं की सब प्रकार रक्षा करता है, वही सब प्रजाजनों से सत्कार पाने योग्य है ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो किसी को नहीं मारता उसको मारने की कोई इच्छा नहीं करता, जो पुरुष बहुत शास्त्रों को पढ़ने और सुनने की इच्छा करता है, वह अति बुद्धिमान् होता है, जो जैसी भावना से प्रजा में वर्त्ताव रखता है, उसके साथ प्रजा भी उसी भावना से वर्त्ताव रखती है ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.