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Rigveda Mandal 3 / Sukta 11 / Mantra 4

62 Sukta
9 Mantra
3/11/4
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒ग्निं सू॒नुं सन॑श्रुतं॒ सह॑सो जा॒तवे॑दसम्। वह्निं॑ दे॒वा अ॑कृण्वत॥

अ॒ग्निम् । सू॒नुम् । सन॑ऽश्रुतम् । सह॑सः । जा॒तऽवे॑दसम् । वह्नि॑म् । दे॒वाः । अ॒कृ॒ण्व॒त॒ ॥

Mantra without Swara
अग्निं सूनुं सनश्रुतं सहसो जातवेदसम्। वह्निं देवा अकृण्वत॥

अग्निम्। सूनुम्। सनऽश्रुतम्। सहसः। जातऽवेदसम्। वह्निम्। देवाः। अकृण्वत॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 9 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हे विद्वानो ! स्वयं (देवाः) विद्वान् हुए आप लोग (सहसः) प्रशंसा करने योग्य विद्या बलवाले के (सूनुम्) पुत्र के सदृश सेवा करने (वह्निम्) अच्छे ही गुणों को धारण करने और (सनश्रुतम्) सनातन शास्त्रों को श्रवण करनेवाले (जातवेदसम्) विद्या से युक्त जिज्ञासु को (अग्निम्) अग्नि के समान तेजस्वी (अकृण्वत) करो ॥४॥
Essence
विद्वान् लोगों को चाहिये कि अपने पुत्रों के सदृश और लोगों के पुत्रों को समझ कर स्नेह से विद्यायुक्त और बहुत शास्त्रों को सुननेवाले अर्थात् जिन्होंने बहुत शास्त्र सुने हों, ऐसे करके आनन्दसहित करें ॥४॥
Subject
अब सन्तानों की शिक्षा विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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