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Rigveda Mandal 3 / Sukta 10 / Mantra 6

62 Sukta
9 Mantra
3/10/6
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृदुष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
अ॒ग्निं व॑र्धन्तु नो॒ गिरो॒ यतो॒ जाय॑त उ॒क्थ्यः॑। म॒हे वाजा॑य॒ द्रवि॑णाय दर्श॒तः॥

अ॒ग्निम् । व॒र्ध॒न्तु॒ । नः॒ । गिरः॑ । यतः॑ । जाय॑ते । उ॒क्थ्यः॑ । म॒हे । वाजा॑य । द्रवि॑णाय । द॒र्श॒तः ॥

Mantra without Swara
अग्निं वर्धन्तु नो गिरो यतो जायत उक्थ्यः। महे वाजाय द्रविणाय दर्शतः॥

अग्निम्। वर्धन्तु। नः। गिरः। यतः। जायते। उक्थ्यः। महे। वाजाय। द्रविणाय। दर्शतः॥

Ashtak » 3 Adhyay » 1 Varga » 8 Mantra » 1

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Meaning
हे विद्वज्जनो ! आप लोग जैसे समिधों से (अग्निम्) अग्नि बढ़ता है वैसे (नः) हम लोगों की (गिरः) उत्तम प्रकार से शिक्षित वाणियों को (वर्धन्तु) वृद्धि करें (यतः) जिससे (महे) श्रेष्ठ (वाजाय) विज्ञान और (द्रविणाय) ऐश्वर्य के लिये (दर्शतः) देखने और (उक्थ्यः) प्रशंसा करने योग्य विद्वान् पुरुष (जायते) प्रकट होता है ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। अध्यापक और उपदेशक पुरुषों को ऐसा प्रयत्न करना चाहिये जिससे कि पढ़ने और सुननेवाले जनों की उत्तम शिक्षा, विद्या और सभ्यता बढ़े और वे धनवान् होवें ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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