Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 3 / Sukta 1 / Mantra 6

62 Sukta
23 Mantra
3/1/6
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
व॒व्राजा॑ सी॒मन॑दती॒रद॑ब्धा दि॒वो य॒ह्वीरव॑साना॒ अन॑ग्नाः। सना॒ अत्र॑ युव॒तयः॒ सयो॑नी॒रेकं॒ गर्भं॑ दधिरे स॒प्त वाणीः॑॥

व॒व्राज॑ । सी॒म् । अन॑दतीः । अद॑ब्धाः । दि॒वः । य॒ह्वीः । अव॑सानाः । अन॑ग्नाः । सनाः॑ । अत्र॑ । यु॒व॒तयः॑ । सऽयो॑नीः । एक॑म् । गर्भ॑म् । द॒धि॒रे॒ । स॒प्त । वाणीः॑ ॥

Mantra without Swara
वव्राजा सीमनदतीरदब्धा दिवो यह्वीरवसाना अनग्नाः। सना अत्र युवतयः सयोनीरेकं गर्भं दधिरे सप्त वाणीः॥

वव्राज। सीम्। अनदतीः। अदब्धाः। दिवः। यह्वीः। अवसानाः। अनग्नाः। सनाः। अत्र। युवतयः। सऽयोनीः। एकम्। गर्भम्। दधिरे। सप्त। वाणीः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 14 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे विद्वान् (सप्त वाणीः) सात वाणियों को (सीम्) सब ओर से (वव्राज) प्राप्त होता वैसे (अत्र) यहाँ (अनदतीः) अविद्यमान अर्थात् अतीव सूक्ष्म जिनके दन्त (अदब्धाः) अहिंसनीय अर्थात् सत्कार करने योग्य (दिवः) देदीप्यमान (यह्वीः) बहुत विद्या और गुण स्वभाव से युक्त (अवसानाः) समीप में ठहरी हुई (अनग्नीः) सब ओर से वस्त्र वा आभूषण आदि से ढपी हुई (सनाः) भोगनेवाली (सयोनीः) समान जिन की योनि अर्थात् एक माता से उत्पन्न हुई सभी वे (युवतयः) प्राप्त यौवना स्त्री (एकम्) एक अर्थात् असहायक (गर्भम्) गर्भ को (दधिरे) धारण करतीं वें सुखी क्यों न हों? ॥६॥
Essence
जो समान रूपवाली स्त्रियाँ अपने-अपने समान पतियों को अपनी इच्छा से प्राप्त होकर परस्पर प्रीति के साथ सन्तानों को उत्पन्न कर और उन की रक्षा कर उनको उत्तम शिक्षा दिलाती हैं वे सुखयुक्त होती हैं। जैसे परा, पश्यन्ती, मध्यमा, वैखरी कर्म्मोपासनाज्ञान प्रकाश करनेवाली तीनों मिल कर और सात वाणी सब व्यवहारों को सिद्ध करती हैं, वैसे विद्वान् स्त्री पुरुष धर्म्म, अर्थ, काम और मोक्ष को सिद्ध कर सकते हैं ॥६॥
Subject
अब स्त्रीपुरुषों के विषय को अगले मन्त्र में कहा है।