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Rigveda Mandal 3 / Sukta 1 / Mantra 20

62 Sukta
23 Mantra
3/1/20
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ए॒ता ते॑ अग्ने॒ जनि॑मा॒ सना॑नि॒ प्र पू॒र्व्याय॒ नूत॑नानि वोचम्। म॒हान्ति॒ वृष्णे॒ सव॑ना कृ॒तेमा जन्म॑ञ्जन्म॒न् निहि॑तो जा॒तवे॑दाः॥

ए॒ता । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । जनि॑म । सना॑नि । प्र । पू॒र्व्याय॑ । नूत॑नानि । वो॒च॒म् । म॒हान्ति॑ । वृष्णे॑ । सव॑ना । कृ॒ता । इ॒मा । जन्म॑न्ऽजन्मन् । निऽहि॑तः । जा॒तऽवे॑दाः ॥

Mantra without Swara
एता ते अग्ने जनिमा सनानि प्र पूर्व्याय नूतनानि वोचम्। महान्ति वृष्णे सवना कृतेमा जन्मञ्जन्मन् निहितो जातवेदाः॥

एता। ते। अग्ने। जनिम। सनानि। प्र। पूर्व्याय। नूतनानि। वोचम्। महान्ति। वृष्णे। सवना। कृता। इमा। जन्मन्ऽजन्मन्। निऽहितः। जातऽवेदाः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 16 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) विद्वान् ! (ते) आपके (एता) इन (जनिम) जन्मों को जो कि (सनानि) कर्मों से संसेवित वा (नूतनानि) नवीन (महान्ति) बड़े-बड़े (सवना) ऐश्वर्य्यसाधक कर्म्म (जन्मन् जन्मन्) जन्म-जन्म में (कृता) किए हुए तथा (इमा) इन ऐश्वर्य्यसाधक कर्म्मों को (पूर्व्याय) पूर्वजों से किए हुए (वृष्णे) बल के लिये (प्र, वोचम्) कहूँ उनको (निहितः) अच्छे प्रकार स्थित (जातवेदाः) जो उत्पन्न हुए पदार्थों में विद्यमान आप सुनो ॥२०॥
Essence
हे मनुष्यो ! जो कर्म जीवों को करने योग्य, उनसे किये जाते और किये जायेंगे, वे सब सुख-दुःख मिश्रित फल भोगनेवाले होते हैं ॥२०॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।