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Rigveda Mandal 3 / Sukta 1 / Mantra 15

62 Sukta
23 Mantra
3/1/15
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ईळे॑ च त्वा॒ यज॑मानो ह॒विर्भि॒रीळे॑ सखि॒त्वं सु॑म॒तिं निका॑मः। दे॒वैरवो॑ मिमीहि॒ सं ज॑रि॒त्रे रक्षा॑ च नो॒ दम्ये॑भि॒रनी॑कैः॥

ईळे॑ । च॒ । त्वा॒ । यज॑मानः । ह॒विःऽभिः॑ । ईळे॑ । स॒खि॒ऽत्वम् । सु॒ऽम॒तिम् । निऽका॑मः । दे॒वैः । अवः॑ । मि॒मी॒हि॒ । सम् । ज॒रि॒त्रे । रक्ष॑ । च॒ । नः॒ । दम्ये॑ऽभिः । अनी॑कैः ॥

Mantra without Swara
ईळे च त्वा यजमानो हविर्भिरीळे सखित्वं सुमतिं निकामः। देवैरवो मिमीहि सं जरित्रे रक्षा च नो दम्येभिरनीकैः॥

ईळे। च। त्वा। यजमानः। हविःऽभिः। ईळे। सखिऽत्वम्। सुऽमतिम्। निऽकामः। देवैः। अवः। मिमीहि। सम्। जरित्रे। रक्ष। च। नः। दम्येऽभिः। अनीकैः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 15 Mantra » 5

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Meaning
(यजमानः) सब विद्या गुणों का संग करनेवाला मैं (देवैः) विद्वानों के साथ (च) और (हविर्भिः) ग्रहण करने योग्य साधनों से जिन (त्वा) आप विद्वानों की (सम् ईळे) सम्यक् स्तुति करता हूँ वा (निकामः) निश्चित कामनावाला होता हुआ (सखित्वम्) मित्रपन वा (सुमतिम्) सुन्दर बुद्धि की (ईळे) प्रशंसा करता हूँ वह आप (जरित्रे) स्तुति करनेवाले मेरे लिये (अवः) रक्षा आदि को (मिमीहि) उत्पन्न करो (दम्येभिः) दमन करने योग्य (अनीकैः) सेनाजनों के साथ (नः) हम लोगों की (च) भी (रक्ष) रक्षा करो ॥१५॥
Essence
मनुष्यों को प्रथम श्रेष्ठ अध्यापक ढूँढना चाहिये और फिर उससे समस्त विद्याओं को ढूँढना चाहिये तदनन्तर विचार पीछे साक्षात्कार अर्थात् प्रत्यक्ष करना उसके परे उपयोग करना चाहिये ॥१५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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