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Rigveda Mandal 3 / Sukta 1 / Mantra 12

62 Sukta
23 Mantra
3/1/12
Devata- अग्निः Rishi- गाथिनो विश्वामित्रः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒क्रो न ब॒भ्रिः स॑मि॒थे म॒हीनां॑ दिदृ॒क्षेयः॑ सू॒नवे॒ भाऋ॑जीकः। उदु॒स्रिया॒ जनि॑ता॒ यो ज॒जाना॒पां गर्भो॒ नृत॑मो य॒ह्वो अ॒ग्निः॥

अ॒क्रः । न । ब॒भ्रिः । स॒म्ऽइ॒थे । म॒हीना॑म् । दि॒दृ॒क्षेयः॑ । सू॒नवे॑ । भाःऽऋ॑जीकः । उत् । उ॒स्रियाः॑ । जनि॑ता । यः । ज॒जान॑ । अ॒पाम् । गर्भः॑ । नृऽत॑मः । य॒ह्वः । अ॒ग्निः ॥

Mantra without Swara
अक्रो न बभ्रिः समिथे महीनां दिदृक्षेयः सूनवे भाऋजीकः। उदुस्रिया जनिता यो जजानापां गर्भो नृतमो यह्वो अग्निः॥

अक्रः। न। बभ्रिः। सम्ऽइथे। महीनाम्। दिदृक्षेयः। सूनवे। भाःऽऋजीकः। उत्। उस्रियाः। जनिता। यः। जजान। अपाम्। गर्भः। नृऽतमः। यह्वः। अग्निः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 15 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो सूर्य्य (अपाम्) जलों के बीच (गर्भः) स्तुति करने के योग्य (यह्वः) महान् (अग्निः) अग्निरूप (उस्रियाः) किरणों से संयुक्त जलों का (जनिता) उत्पन्न करनेवाला होता है उस के (दिदृक्षेयः) देखने को चाहता मैं उत्तम (नृतमः) अतीव नेता सब का नायक (उज्जजान) उत्तमता से प्रकट होता है वह (सूनवे) सन्तान के लिये (महीनाम्) पूजनीय सेनाओं के (समिथे) संग्राम के बीच (बभ्रिः) धारण करनेवाला (अक्रः) किसी प्रकार से आक्रमण करने को अयोग्य के (न) समान (भाऋजीकः) विद्यादीप्तियों से सरल होता है ॥१२॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे सूर्य्य जलों के गर्भ को उत्पन्न कर तथा मेघ के साथ अच्छे प्रकार युद्ध कर जल वर्षा कर सबको बढ़ाता है, वैसे सन्तानों को शिक्षा देनेवाले सब जगह विजयी होते हैं ॥१२॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।