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Rigveda Mandal 2 / Sukta 8 / Mantra 4

43 Sukta
6 Mantra
2/8/4
Devata- अग्निः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ यः स्व१॒॑र्ण भा॒नुना॑ चि॒त्रो वि॒भात्य॒र्चिषा॑। अ॒ञ्जा॒नो अ॒जरै॑र॒भि॥

आ । यः । स्वः॑ । न । भा॒नुना॑ । चि॒त्रः । वि॒ऽभाति॑ । अ॒र्चिषा॑ । अ॒ञ्जा॒नः । अ॒जरैः॑ । अ॒भि ॥

Mantra without Swara
आ यः स्व१र्ण भानुना चित्रो विभात्यर्चिषा। अञ्जानो अजरैरभि॥

आ। यः। स्वः। न। भानुना। चित्रः। विऽभाति। अर्चिषा। अञ्जानः। अजरैः। अभि॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 29 Mantra » 4

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Meaning
(यः) जो बिजुलीरूप (चित्रः) चित्र-विचित्र अद्भुत अग्नि (अजरैः) अविनाशी पदार्थों से (अभि,अञ्जानः) सब ओर से सब पदार्थों को प्रकट करता हुआ अग्नि (अर्चिषा) प्रशंसनीय (भानुना) प्रकाश से (स्वः) आदित्य के (न) समान (आ,विभाति) अच्छे प्रकार प्रकाशित होता है, वह सबको ढूँढने योग्य है ॥४॥
Essence
अग्नि यह सूक्ष्म परमाणुरूप पदार्थों में सर्वदा अपने रूप के साथ रहता है। काष्ठ आदि में पदार्थों की वृद्धि और न्यूनता आदि से कोई समय बढ़ता और कभी कमती होता है ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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