Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 8 / Mantra 3

43 Sukta
6 Mantra
2/8/3
Devata- अग्निः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य उ॑ श्रि॒या दमे॒ष्वा दो॒षोषसि॑ प्रश॒स्यते॑। यस्य॑ व्र॒तं न मीय॑ते॥

यः । ऊँ॒ इति॑ । श्रि॒या । दमे॑षु । आ । दो॒षा । उ॒षसि॑ । प्र॒ऽश॒स्यते॑ । यस्य॑ । व्र॒तम् । न । मीय॑ते ॥

Mantra without Swara
य उ श्रिया दमेष्वा दोषोषसि प्रशस्यते। यस्य व्रतं न मीयते॥

यः। ऊँ इति। श्रिया। दमेषु। आ। दोषा। उषसि। प्रऽशस्यते। यस्य। व्रतम्। न। मीयते॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 29 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वान् ! आप (यः) जो (दमेषु) घरों में (दोषा) वा रात्रि और (उषसि) दिन में (श्रिया) शोभा से (आ,प्रशस्यते) अच्छे प्रकार प्रशंसा को प्राप्त किया जाता और (यस्य) जिसका (व्रतम्,उ) शील (न)(मीयते) नष्ट होता है, उसके समान हूजिये ॥३॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे अग्नि का शील और स्वरूप अनादि अविनाशी वर्त्तमान है, वैसे ईश्वर, जीव और आकाश आदि पदार्थों का शील और स्वरूप नित्य वर्त्तमान है ॥३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ॥