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Rigveda Mandal 2 / Sukta 7 / Mantra 5

43 Sukta
6 Mantra
2/7/5
Devata- अग्निः Rishi- सोमाहुतिर्भार्गवः Chhanda- विराट्पिपीलिकामध्यागायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त्वं नो॑ असि भार॒ताग्ने॑ व॒शाभि॑रु॒क्षभिः॑। अ॒ष्टाप॑दीभि॒राहु॑तः॥

त्वम् । नः॒ । अ॒सि॒ । भा॒र॒त॒ । अग्ने॑ । व॒शाभिः॑ । उ॒क्षऽभिः॑ । अ॒ष्टाऽप॑दीभिः । आऽहु॑तः ॥

Mantra without Swara
त्वं नो असि भारताग्ने वशाभिरुक्षभिः। अष्टापदीभिराहुतः॥

त्वम्। नः। असि। भारत। अग्ने। वशाभिः। उक्षऽभिः। अष्टाऽपदीभिः। आऽहुतः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 28 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (भारत) सब विषयों को धारण करनेवाले (अग्ने) विद्वान् ! जो (वशाभिः) मनोहर गौओं से वा (उक्षभिः) बैलों से वा (अष्टापदीभिः) जिनमें आठ सत्यासत्य के निर्णय करनेवाले चरण हैं। उन वाणियों से (आऽहुतः) बुलाये हुए आप (नः) हम लोगों के लिये सुख दिये हुए (असि) हैं। सो हम लोगों से सत्कार पाने योग्य हैं ॥५॥
Essence
जो मनुष्य आठ स्थानों में उच्चारण की हुई वाणी से सत्य का उपदेश करता हुआ गवादि पशुओं की रक्षा से सबकी पालना का विधान करता है, वह सबको रखने के योग्य है ॥५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।