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Rigveda Mandal 2 / Sukta 7 / Mantra 1

43 Sukta
6 Mantra
2/7/1
Devata- अग्निः Rishi- सोमाहुतिर्भार्गवः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
श्रेष्ठं॑ यविष्ठ भार॒ताग्ने॑ द्यु॒मन्त॒मा भ॑र। वसो॑ पुरु॒स्पृहं॑ र॒यिम्॥

श्रेष्ठ॑म् । य॒वि॒ष्ठ॒ । भा॒र॒त॒ । अग्ने॑ । द्यु॒ऽमन्त॑म् । आ । भ॒र॒ । वसो॒ इति॑ । पु॒रु॒ऽस्पृह॑म् । र॒यिम् ॥

Mantra without Swara
श्रेष्ठं यविष्ठ भारताग्ने द्युमन्तमा भर। वसो पुरुस्पृहं रयिम्॥

श्रेष्ठम्। यविष्ठ। भारत। अग्ने। द्युऽमन्तम्। आ। भर। वसो इति। पुरुऽस्पृहम्। रयिम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 28 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वसो) सुखों में वास कराने और (भारत) सब विद्या विषयों को धारण करनेवाले (यविष्ठ) अतीव युवावस्था युक्त (अग्ने) अग्नि के समान प्रकाशमान विद्वान् ! आप (श्रेष्ठम्) अत्यन्त कल्याण करनेवाली (द्युमन्तम्) बहुत प्रकाशयुक्त (पुरुस्पृहम्) बहुतों को चाहने योग्य (रयिम्) लक्ष्मी को (आ, भर) अच्छे प्रकार धारण कीजिये ॥१॥
Essence
जो उत्तम धन लाभ के लिये बहुत यत्न करते हैं, वे धनाढ्य होते हैं ॥१॥
Subject
अब छः चावाले सातवें सूक्त का आरम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में विद्वानों के गुणों का वर्णन करते हैं।