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Rigveda Mandal 2 / Sukta 6 / Mantra 7

43 Sukta
8 Mantra
2/6/7
Devata- अग्निः Rishi- सोमाहुतिर्भार्गवः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒न्तर्ह्य॑ग्न॒ ईय॑से वि॒द्वान् जन्मो॒भया॑ कवे। दू॒तो जन्ये॑व॒ मित्र्यः॑॥

अ॒न्तः । हि । अ॒ग्ने॒ । ईय॑से । वि॒द्वान् । जन्म॑ । उ॒भया॑ । क॒वे॒ । दू॒तः । जन्या॑ऽइव । मित्र्यः॑ ॥

Mantra without Swara
अन्तर्ह्यग्न ईयसे विद्वान् जन्मोभया कवे। दूतो जन्येव मित्र्यः॥

अन्तः। हि। अग्ने। ईयसे। विद्वान्। जन्म। उभया। कवे। दूतः। जन्याऽइव। मित्र्यः॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 27 Mantra » 7

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1 Bhashyas
Meaning
हे (कवे) क्रम-क्रम से बुद्धि को विषयों में प्रविष्ट करनेवाले सर्वज्ञ (अग्ने) बिजुली के समान आप ही प्रकाशमान जगदीश्वर वा (विद्वान्) सब विषयों को जाननेवाले विद्वान् जन ! आप (हि) ही (मित्र्यः) मित्रों में साधु (दूतः) सबसे समाचार के देनेहारे (जन्येव) जनों के लिये हितकारी जैसे हो वैसे (अन्तः) हृदयाकाश के बीच (ईयसे) प्राप्त होते हो (उभया) वर्त्तमान के साथ अगले-पिछिले (जन्म) जन्म और कर्मों को जानते हो इससे हम लोगों के उपासना करने योग्य हो ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे सत्य का उपदेश और सत्य का आचरण करनेवाला पुरुष सबके प्रिय पियारे काम को चाहनेवाला सबका मित्र शास्त्रज्ञ धर्मात्मा विद्वान् बाहर-भीतर विज्ञान देकर धर्म में नियत करता है, वैसे भीतर-बाहर स्थित परमेश्वर सबके समस्त कामों को जानकर फल देता है ॥७॥
Subject
अब ईश्वर के विषय को अगले मन्त्र में कहा है।