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Rigveda Mandal 2 / Sukta 6 / Mantra 4

43 Sukta
8 Mantra
2/6/4
Devata- अग्निः Rishi- सोमाहुतिर्भार्गवः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स बो॑धि सू॒रिर्म॒घवा॒ वसु॑पते॒ वसु॑दावन्। यु॒यो॒ध्य१॒॑स्मद्द्वेषां॑सि॥

सः । बो॒धि॒ । सू॒रिः । म॒घवा॑ । वसु॑ऽपते । वसु॑ऽदावन् । यु॒यो॒धि । अ॒स्मत् । द्वेषां॑सि ॥

Mantra without Swara
स बोधि सूरिर्मघवा वसुपते वसुदावन्। युयोध्य१स्मद्द्वेषांसि॥

सः। बोधि। सूरिः। मघवा। वसुऽपते। वसुऽदावन्। युयोधि। अस्मत्। द्वेषांसि॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 27 Mantra » 4

Bhashya

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Meaning
हे (वसुपते) धनों की पालना करने और (वसुदावन्) धनों को देनेवाले जो (मघवा) परमप्रशंसित धनयुक्त (सूरिः) विद्वान् ! आप (बोधि) सब व्यवहारों को जानते हैं। (सः) सो आप (अस्मत्) हम लोगों के (द्वेषांसि) वैर भरे हुए कामों को (युयोधि) अलग कीजिये ॥४॥
Essence
जो राग-द्वेषरहित गुणग्राही जन होते हैं, वे औरों को भी अपने सदृश करके दाता होते हुए लक्ष्मीवान् होते हैं ॥४॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

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