Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 5 / Mantra 4

43 Sukta
8 Mantra
2/5/4
Devata- अग्निः Rishi- सोमाहुतिर्भार्गवः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
सा॒कं हि शुचि॑ना॒ शुचिः॑ प्रशा॒स्ता क्रतु॒नाज॑नि। वि॒द्वाँ अ॑स्य व्र॒ता ध्रु॒वा व॒याइ॒वानु॑ रोहते॥

सा॒कम् । हि । शुचि॑ना॒ । शुचिः॑ । प्र॒ऽशा॒स्ता । क्रतु॑ना । अज॑नि । वि॒द्वान् । अ॒स्य॒ । व्र॒ता । ध्रु॒वा । व॒याःऽइ॑व । अनु॑ । रो॒ह॒ते॒ ॥

Mantra without Swara
साकं हि शुचिना शुचिः प्रशास्ता क्रतुनाजनि। विद्वाँ अस्य व्रता ध्रुवा वयाइवानु रोहते॥

साकम्। हि। शुचिना। शुचिः। प्रऽशास्ता। क्रतुना। अजनि। विद्वान्। अस्य। व्रता। ध्रुवा। वयाःऽइव। अनु। रोहते॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 26 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (विद्वान्) विद्वान् जन (शुचिना) पवित्र (क्रतुना) बुद्धि वा कर्म के (साकम्) साथ (शुचिः) शुद्ध (प्रशास्ता) उत्तम शासनकर्त्ता (अजनि) उत्पन्न होता है (हि) वही (अस्य) इस ईश्वर प्रकाशित चारों वेदों के (ध्रुवा) निश्चल अविनाशी (व्रता) सत्याचरणों को स्वीकार कर (वयाइव) विस्तार को प्राप्त शाखाओं के समान (अनु, रोहते) वृद्धि को प्राप्त होता है ॥४॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो पवित्र विद्वानों के साथ सङ्ग कर, उत्तम बुद्धि को उत्पन्न करके, अज्ञजनों के उपदेशक हो, वेदविहित कर्मों का आचरण कर आप बढ़ते हैं, वे औरों की उन्नति करनेवाले होते हैं ॥४॥
Subject
अब विद्वानों के गुणों को कहते हैं।