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Rigveda Mandal 2 / Sukta 5 / Mantra 1

43 Sukta
8 Mantra
2/5/1
Devata- अग्निः Rishi- सोमाहुतिर्भार्गवः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
होता॑जनिष्ट॒ चेत॑नः पि॒ता पि॒तृभ्य॑ ऊ॒तये॑। प्र॒यक्ष॒ञ्जेन्यं॒ वसु॑ श॒केम॑ वा॒जिनो॒ यम॑म्॥

होता॑ । अ॒ज॒नि॒ष्ट॒ । चेत॑नः । पि॒ता । पि॒तृऽभ्यः॑ । ऊ॒तये॑ । प्र॒ऽयक्ष॑न् । जेन्य॑म् । वसु॑ । श॒केम॑ । वा॒जिनः॑ । यम॑म् ॥

Mantra without Swara
होताजनिष्ट चेतनः पिता पितृभ्य ऊतये। प्रयक्षञ्जेन्यं वसु शकेम वाजिनो यमम्॥

होता। अजनिष्ट। चेतनः। पिता। पितृऽभ्यः। ऊतये। प्रऽयक्षन्। जेन्यम्। वसु। शकेम। वाजिनः। यमम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 5 Varga » 26 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
जैसे (होता) आदाता अर्थात् गुणादि वा अन्य पदार्थों का ग्रहणकर्त्ता (चेतनः) ज्ञानादि गुणयुक्त (पिता) और पालन करनेवाला जीव (ऊतये) रक्षा आदि के लिये (पितृभ्यः) वा पालन करनेवालों के लिये (जेन्यम्) जीतने योग्य (यमम्) नियमकर्त्ता को और (वसु) धन को (अजनिष्ट) उत्पन्न करे और विद्वान् जन (प्रयक्षन्) प्रकृष्टता से सङ्ग करते हैं वैसे (वाजिनः) विज्ञानवान् हम लोग उक्त विषय की प्राप्ति कर (शकेम) सकें ॥१॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो! जैसे सच्चिदानन्दस्वरूप परमेश्वर इस संसार में सबकी रक्षा के लिये अनेक द्रव्यों को रचता है, वैसे विद्वान् जन भी आचरण करें ॥१॥
Subject
अब आठ चावाले पाँचवें सूक्त का आरम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में जीव के गुणों का वर्णन करते हैं।