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Rigveda Mandal 2 / Sukta 41 / Mantra 15

43 Sukta
21 Mantra
2/41/15
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इन्द्र॑ज्येष्ठा॒ मरु॑द्गणा॒ देवा॑सः॒ पूष॑रातयः। विश्वे॒ मम॑ श्रुता॒ हव॑म्॥

इन्द्र॑ऽज्येष्ठाः । मरु॑त्ऽगणाः । देवा॑सः । पूष॑ऽरातयः । विश्वे॑ । मम॑ । श्रु॒त॒ । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
इन्द्रज्येष्ठा मरुद्गणा देवासः पूषरातयः। विश्वे मम श्रुता हवम्॥

इन्द्रऽज्येष्ठाः। मरुत्ऽगणाः। देवासः। पूषऽरातयः। विश्वे। मम। श्रुत। हवम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 9 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (इन्द्रज्येष्ठाः) परम विद्यारूप ऐश्वर्य जिनके प्रधान है वे (विश्वे) सब (देवासः) विद्वानो ! (पूषरातयः) जिनका पुष्टि के निमित्त दान है वे (मरुद्गणाः) बहुत मनुष्य तुम लोग (मम) मेरे (हवम्) ग्रहण करने योग्य विद्यार्थसम्बन्ध को (श्रुत) सुनो ॥१५॥
Essence
जो विद्यादि गुणों में प्रधान पुरुष का सत्कार करते विद्या देते और दूसरों से लेते हैं, वे परीक्षक होके औरों को विद्वान् करते हैं ॥१५॥
Subject
फिर उसी विषय को कहते हैं।