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Rigveda Mandal 2 / Sukta 41 / Mantra 13

43 Sukta
21 Mantra
2/41/13
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्वे॑ देवास॒ आ ग॑त शृणु॒ता म॑ इ॒मं हव॑म्। एदं ब॒र्हिर्नि षी॑दत॥

विश्वे॑ । दे॒वा॒सः॒ । आ । ग॒त॒ । शृ॒णु॒त । मे॒ । इ॒मम् । हव॑म् । आ । इ॒दम् । ब॒र्हिः । नि । सी॒द॒त॒ ॥

Mantra without Swara
विश्वे देवास आ गत शृणुता म इमं हवम्। एदं बर्हिर्नि षीदत॥

विश्वे। देवासः। आ। गत। शृणुत। मे। इमम्। हवम्। आ। इदम्। बर्हिः। नि। सीदत॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 9 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (विश्वे) सब (देवासः) विद्वानो ! तुम (आ,गत) आओ और (इदम्) इस (बर्हिः) उत्तमासन पर (निषीदत) बैठो (मे) और मेरे (इमम्) इस (हवम्) ग्रहण करने योग्य शब्दार्थसम्बन्ध को (आ,शृणुत) अच्छे प्रकार सुनो ॥१३॥
Essence
विद्यार्थी जन पढ़ानेवालों से यह कहें कि आप यहाँ आइये, सर्वोत्तम आसन पर बैठ के हमने जो शास्त्र पढ़े, उनमें परीक्षा कीजिये ॥१३॥
Subject
फिर अध्यापक और अध्येताओं के विषय को कहते हैं।