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Rigveda Mandal 2 / Sukta 40 / Mantra 1

43 Sukta
6 Mantra
2/40/1
Devata- सोमापूषणावदितिश्च Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
सोमा॑पूषणा॒ जन॑ना रयी॒णां जन॑ना दि॒वो जन॑ना पृथि॒व्याः। जा॒तौ विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य गो॒पौ दे॒वा अ॑कृण्वन्न॒मृत॑स्य॒ नाभि॑म्॥

सोमा॑पूषणा । जन॑ना । र॒यी॒णाम् । जन॑ना । दि॒वः । जन॑ना । पृ॒थि॒व्याः । जा॒तौ । विश्व॑स्य । भुव॑नस्य । गो॒पौ । दे॒वाः । अ॒कृ॒ण्व॒न् । अ॒मृत॑स्य । नाभि॑म् ॥

Mantra without Swara
सोमापूषणा जनना रयीणां जनना दिवो जनना पृथिव्याः। जातौ विश्वस्य भुवनस्य गोपौ देवा अकृण्वन्नमृतस्य नाभिम्॥

सोमापूषणा। जनना। रयीणाम्। जनना। दिवः। जनना। पृथिव्याः। जातौ। विश्वस्य। भुवनस्य। गोपौ। देवाः। अकृण्वन्। अमृतस्य। नाभिम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 6 Mantra » 1

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Meaning
हे मनुष्यो ! (देवाः) विद्वान् जन जिन (रयीणाम्) धनों को (जनना) सुखपूर्वक उत्पन्न करनेवाले वा (दिवः) प्रकाश के (जनना) उत्पन्न करनेवाले (पृथिव्याः) पृथिवी के (जनना) उत्पन्न करनेवाले (जातौ) उत्पन्न हुए (विश्वस्य) समस्त (भुवनस्य) संसार की (गोपौ) रक्षा करनेवाले (सोमापूषणा) प्राण और अपान (अमृतस्य) नाशरहित पदार्थ के (नाभिम्) मध्यभाग को (अकृण्वन्) प्रकट करें उनको विशेषता से जानो ॥१॥
Essence
मनुष्यों को प्रकाश पृथिवी और धनों के निमित्त होकर सबकी रक्षा करनेवाले परमात्मा का विज्ञान करानेवाले प्राण और अपान वर्त्तमान हैं, यह जानना चाहिये ॥१॥
Subject
अब चालीसवें सूक्त का आरम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में पवन के गुणों का उपदेश कहते हैं।

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