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Rigveda Mandal 2 / Sukta 39 / Mantra 7

43 Sukta
8 Mantra
2/39/7
Devata- अश्विनौ Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
हस्ते॑व श॒क्तिम॒भि सं॑द॒दी नः॒ क्षामे॑व नः॒ सम॑जतं॒ रजां॑सि। इ॒मा गिरो॑ अश्विना युष्म॒यन्तीः॒ क्ष्णोत्रे॑णेव॒ स्वधि॑तिं॒ सं शि॑शीतम्॥

हस्ता॑ऽइव । श॒क्तिम् । अ॒भि । स॒न्द॒दी इति॑ स॒म्ऽद॒दी । नः॒ । क्षामा॑ऽइव । नः॒ । सम् । अ॒ज॒त॒म् । रजां॑सि । इ॒माः । गिरः॑ । अ॒श्वि॒ना॒ । यु॒ष्म॒ऽयन्तीः॑ । क्ष्णोत्रे॑णऽइव । स्वऽधि॑तिम् । सम् । शि॒शी॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
हस्तेव शक्तिमभि संददी नः क्षामेव नः समजतं रजांसि। इमा गिरो अश्विना युष्मयन्तीः क्ष्णोत्रेणेव स्वधितिं सं शिशीतम्॥

हस्ताऽइव। शक्तिम्। अभि। सन्ददी इति सम्ऽददी। नः। क्षामाऽइव। नः। सम्। अजतम्। रजांसि। इमाः। गिरः। अश्विना। युष्मऽयन्तीः। क्ष्णोत्रेणऽइव। स्वऽधितिम्। सम्। शिशीतम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 5 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अश्विना) वायु और अग्नि के समान वर्त्तमान पढ़ाने और परीक्षा करनेवालो ! जो अग्नि और वायु (शक्तिम्) तीक्ष्ण अग्रभागवाली शक्ति को (हस्तेव) हाथों के समान (नः) हम लोगों को (अभि,सन्ददी) जिनसे अच्छे प्रकार देते वा (क्षामेव) पृथिवी के समान (नः) हम लोगों को (रजांसि) ऐश्वर्यवालों को (समजतम्) अच्छे प्रकार प्राप्त कराते हैं वा (क्ष्णोत्रेणेव) तेजस्वी करनेवाले साधन से जैसे वैसे (इमाः) इन (युष्मयन्तीः) जो तुमको कहती हैं उन (गिरः) सुशिक्षित वाणियों को (स्वधितिम्) वज्र के समान (सम्,शिशीतम्) तीक्ष्ण करें उनके गुण-कर्म और स्वभावों को हम लोगों को बताओ ॥७॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे विद्वानो ! जो हाथ की क्रिया को करनेवाले पृथिवी के समान ऐश्वर्य देने अच्छी शिक्षित वाणी के समान पदार्थों को बताने तीक्ष्ण वज्र के समान दारिद्र्य और दुःख का विनाश करनेवाले अग्न्यादि पदार्थ हैं, उनको आज हम लोगों को ग्रहण कराओ ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।