Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 39 / Mantra 6

43 Sukta
8 Mantra
2/39/6
Devata- अश्विनौ Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ओष्ठा॑विव॒ मध्वा॒स्ने वद॑न्ता॒ स्तना॑विव पिप्यतं जी॒वसे॑ नः। नासे॑व नस्त॒न्वो॑ रक्षि॒तारा॒ कर्णा॑विव सु॒श्रुता॑ भूतम॒स्मे॥

ओष्ठौ॑ऽइव । मधु॑ । आ॒स्ने । वद॑न्ता । स्तनौ॑ऽइव । पि॒प्य॒त॒म् । जी॒वसे॑ । नः॒ । नासा॑ऽइव । नः॒ । त॒न्वः॑ । र॒क्षि॒तारा॑ । कर्णौ॑ऽइव । सु॒ऽश्रुता॑ । भू॒त॒म् । अ॒स्मे इति॑ ॥

Mantra without Swara
ओष्ठाविव मध्वास्ने वदन्ता स्तनाविव पिप्यतं जीवसे नः। नासेव नस्तन्वो रक्षितारा कर्णाविव सुश्रुता भूतमस्मे॥

ओष्ठौऽइव। मधु। आस्ने। वदन्ता। स्तनौऽइव। पिप्यतम्। जीवसे। नः। नासाऽइव। नः। तन्वः। रक्षितारा। कर्णौऽइव। सुऽश्रुता। भूतम्। अस्मे इति॥

Ashtak » 2 Adhyay » 8 Varga » 5 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वानो! तुम जो (आस्ने) मुख के लिए (मधु) मधुर रस को (ओष्ठाविव) ओष्ठों के समान (वदन्ता) कहते हुए (जीवसे) जीवने को (स्तनाविव) स्तनों के समान (नः) हमारे लिए (पिप्यतम्) बढ़ाते अर्थात् जैसे स्तनों में उत्पन्न हुए दुग्ध से जीवन बढ़ता है, वैसे बढ़ाते (नासेव) और नासिका के समान (नः) हमारे (तन्वः) शरीर की (रक्षितारा) रक्षा करनेवाले वा (अस्मे) हम लोगों के लिये (कर्णाविव) कर्णों के समान (सुश्रुता) जिनसे सुन्दर श्रवण होता है ऐसे (भूतम्) होते हैं उन वायु और अग्नि को विदित कराइये ॥६॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जो अध्यापक जिह्वा से रस के समान, स्तनों से दुग्ध के समान, नासिका से गन्ध के तुल्य, कान से शब्द के समान समस्त विद्याओं को प्रत्यक्ष कराते हैं, वे जगत्पूज्य होते हैं ॥६॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।