Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 35 / Mantra 4

43 Sukta
15 Mantra
2/35/4
Devata- अपान्नपात् Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
तमस्मे॑रा युव॒तयो॒ युवा॑नं मर्मृ॒ज्यमा॑नाः॒ परि॑ य॒न्त्यापः॑। स शु॒क्रेभिः॒ शिक्व॑भी रे॒वद॒स्मे दी॒दाया॑नि॒ध्मो घृ॒तनि॑र्णिग॒प्सु॥

तम् । अस्मे॑राः । यु॒व॒तयः॑ । युवा॑नम् । म॒र्मृ॒ज्यमा॑नाः । परि॑ । य॒न्ति॒ । आपः॑ । सः । शु॒क्रेभिः॑ । शिक्व॑ऽभिः । रे॒वत् । अ॒स्मे इति॑ । दी॒दाय॑ । अ॒नि॒ध्मः । घृ॒तऽनि॑र्निक् । अ॒प्ऽसु ॥

Mantra without Swara
तमस्मेरा युवतयो युवानं मर्मृज्यमानाः परि यन्त्यापः। स शुक्रेभिः शिक्वभी रेवदस्मे दीदायानिध्मो घृतनिर्णिगप्सु॥

तम्। अस्मेराः। युवतयः। युवानम्। मर्मृज्यमानाः। परि। यन्ति। आपः। सः। शुक्रेभिः। शिक्वऽभिः। रेवत्। अस्मे इति। दीदाय। अनिध्मः। घृतऽनिर्निक्। अप्ऽसु॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 22 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (अस्मेराः) हम लोगों को प्रेरणा देनेवाली (मर्मृज्यमानाः) निरन्तर शुद्ध (युवतयः) युवति (शिक्वभिः) सेचनाओं से (शुक्रेभिः) शुद्ध जल वा वीर्यों के साथ (आपः) नदियाँ समुद्र को जैसे-वैसे (तम्) उस (युवानम्) युवा पुरुष को (परियन्ति) सब ओर से प्राप्त होतीं वैसे (सः) वह, तू (अनिध्मः) प्रकाशमान (अस्मे) हम लोगों को (रेवत्) श्रीमान् के समान (दीदाय) प्रकाशित करो वा और (अप्सु) जलों में (घृतनिर्णिक्) जल को पुष्टि देनेवाले सूर्य के समान हम लोगों को श्रेष्ठ उपदेश से शुद्ध करें ॥४॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे अच्छे प्रकार युवावस्था को प्राप्त युवति स्त्री ब्रह्मचर्य से की विद्या जिन्होंने ऐसे हृदय को प्रिय पूर्ण विद्यावान् युवा पतियों को अच्छे प्रकार परीक्षा कर प्राप्त होती, वैसे पुरुष भी इनको प्राप्त हों, जैसे सूर्य जल को संशोधन कर वृष्टि से सबको सुखी करता है, वैसे अच्छे प्रकार शुद्ध परस्पर प्रीतिमान् विद्वान् विवाह किये हुये स्त्री पुरुष अपने सन्तानों को शुद्ध करने को योग्य हैं ॥४॥
Subject
अब विवाह विषय को अगले मन्त्र में कहा है।