Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 35 / Mantra 13

43 Sukta
15 Mantra
2/35/13
Devata- अपान्नपात् Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- निचृत्त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स ईं॒ वृषा॑जनय॒त्तासु॒ गर्भं॒ स ईं॒ शिशु॑र्धयति॒ तं रि॑हन्ति। सो अ॒पां नपा॒दन॑भिम्लातवर्णो॒ऽन्यस्ये॑वे॒ह त॒न्वा॑ विवेष॥

सः । ई॒म् । वृषा॑ । अ॒ज॒न॒य॒त् । तासु॑ । गर्भ॑म् । सः । ई॒म् । शिशुः॑ । ध॒य॒ति॒ । तम् । रि॒ह॒न्ति॒ । सः । अ॒पाम् । नपा॑त् । अन॑भिम्लातऽवर्णः । अ॒न्यस्य॑ऽइव । इ॒ह । त॒न्वा॑ । वि॒वे॒ष॒ ॥

Mantra without Swara
स ईं वृषाजनयत्तासु गर्भं स ईं शिशुर्धयति तं रिहन्ति। सो अपां नपादनभिम्लातवर्णोऽन्यस्येवेह तन्वा विवेष॥

सः। ईम्। वृषा। अजनयत्। तासु। गर्भम्। सः। ईम्। शिशुः। धयति। तम्। रिहन्ति। सः। अपाम्। नपात्। अनभिम्लातऽवर्णः। अन्यस्यऽइव। इह। तन्वा। विवेष॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 24 Mantra » 3

Bhashya

More bhashyas
Meaning
(सः) वह (वृषा) वर्षा करनेवाला अग्नि (तासु) उन जलों में (ईम्) ही (गर्भम्) गर्भ को (अजनयत्) उत्पन्न करता है और (सः) वह (शिशुः) बालक (ईम्) ही (धयति) पीता है (तम्) उसको और (रिहन्ति) चाटते हैं (सः) वह (अपाम्) जलों के बीच (अनभिम्लातवर्णः) जिसका वर्ण सब ओर से क्षीण न हो (नपात्) सन्तान (अन्यस्येव) जैसे और के शरीर में प्रविष्ट होता वैसे ही (इह) इस संसार में (तन्वा) शरीर के साथ (विवेष) व्याप्त होता है ॥१३॥
Essence
जो पुरुष अपनी स्त्री में गर्भ धारण कर सन्तान को उत्पन्न वा पालन कर और स्वादिष्ट अन्न खाय शरीर की प्रसन्नाकृति से चेष्टा करते हैं, वे इस संसार में सुखों को प्राप्त होते हैं ॥१३॥
Subject
अब इस जगत् में कौन लोग सुख पाते हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.