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Rigveda Mandal 2 / Sukta 34 / Mantra 9

43 Sukta
15 Mantra
2/34/9
Devata- मरुतः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यो नो॑ मरुतो वृ॒कता॑ति॒ मर्त्यो॑ रि॒पुर्द॒धे व॑सवो॒ रक्ष॑ता रि॒षः। व॒र्तय॑त॒ तपु॑षा च॒क्रिया॒भि तमव॑ रुद्रा अ॒शसो॑ हन्तना॒ वधः॑॥

यः । नः॒ । म॒रु॒तः॒ । वृ॒कऽता॑ति । मर्त्यः॑ । रि॒पुः । द॒धे । व॒स॒वः॒ । रक्ष॑त । रि॒षः । व॒र्तय॑त । वपु॑षा । च॒क्रिया॑ । अ॒भि । तम् । अव॑ । रु॒द्राः॒ । अ॒शसः॑ । ह॒न्त॒न॒ । वध॒रिति॑ ॥

Mantra without Swara
यो नो मरुतो वृकताति मर्त्यो रिपुर्दधे वसवो रक्षता रिषः। वर्तयत तपुषा चक्रियाभि तमव रुद्रा अशसो हन्तना वधः॥

यः। नः। मरुतः। वृकऽताति। मर्त्यः। रिपुः। दधे। वसवः। रक्षत। रिषः। वर्तयत। तपुषा। चक्रिया। अभि। तम्। अव। रुद्राः। अशसः। हन्तन। वधरिति॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 20 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (वसवः) वसु संज्ञावाले (मरुतः) विद्वान् मनुष्यो ! (यः) जो (वृकताति) वज्र ही (मर्त्यः) मरणधर्मा (रिपुः) चोर (तपुषा) सब ओर से ताप देनेवाले क्रोध आदि से (नः) हमलोगों को (दधे) धारण करता है उससे (रिषः) हिंसकों को अलग (रक्षत) रखो, हे (रुद्राः) दुष्टों को रुलानेवाले मध्यम विद्वानो ! तुम (चक्रिया) चक्र से (अशसः) अहिंसक जो दूसरों का विनाश नहीं करता उसको (अव,हन्तन) न मारो, जो हम लोगों की रक्षा करता है, उसकी सब ओर से रक्षा करो, जिसने और का (वधः) बध किया है, उसको कारागृह अर्थात् जेलखाना में (अभि,वर्त्तयत) सब ओर से वर्त्ताओ ॥९॥
Essence
राजपुरुषों को हिंसकों से प्रजाजनों को अलग रख शत्रुओं का निवारण कर वा बाँध के धर्म से राज्य का शासन करना चाहिये ॥९॥
Subject
फिर राजपुरुषों के विषय को अगले मन्त्र में कहा है।