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Rigveda Mandal 2 / Sukta 34 / Mantra 8

43 Sukta
15 Mantra
2/34/8
Devata- मरुतः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यद्यु॒ञ्जते॑ म॒रुतो॑ रु॒क्मव॑क्ष॒सोऽश्वा॒न्रथे॑षु॒ भग॒ आ सु॒दान॑वः। धे॒नुर्न शिश्वे॒ स्वस॑रेषु पिन्वते॒ जना॑य रा॒तह॑विषे म॒हीमिष॑म्॥

यत् । यु॒ञ्जते॑ । म॒रुतः॑ । रु॒क्मऽव॑क्षसः । अश्वा॑न् । रथे॑षु । भगे॑ । आ । सु॒ऽदान॑वः । धे॒नुः । न । शिश्वे॑ । स्वस॑रेषु । पि॒न्व॒ते॒ । जना॑य । रा॒तऽह॑विषे । म॒हीम् । इष॑म् ॥

Mantra without Swara
यद्युञ्जते मरुतो रुक्मवक्षसोऽश्वान्रथेषु भग आ सुदानवः। धेनुर्न शिश्वे स्वसरेषु पिन्वते जनाय रातहविषे महीमिषम्॥

यत्। युञ्जते। मरुतः। रुक्मऽवक्षसः। अश्वान्। रथेषु। भगे। आ। सुऽदानवः। धेनुः। न। शिश्वे। स्वसरेषु। पिन्वते। जनाय। रातऽहविषे। महीम्। इषम्॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 20 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (रुक्मवक्षसः) सुवर्ण के समान वक्षःस्थलवाले (सुदानवः) उत्तम पदार्थों के दानकर्त्ता (मरुतः) विद्वान् पुरुषो (भगे) ऐश्वर्य के होते (रथेषु) यानों में (यत्) जिन (अश्वान्) घोड़े वा अग्न्यादि पदार्थों को (युञ्जते) युक्त करते वा (स्वसरेषु) दिनों के बीच (शिश्वे) बालक वा जो (रातहविषे) देने योग्य दे चुका उस (जनाय) सत्पुरुष के लिये (धेनुः) दुग्ध देनेवाली गौ बछड़े को (न) जैसे-वैसे (महीम्) अत्यन्त (इषम्) इच्छा को (आ,पिन्वते) अच्छे प्रकार सींचते हैं, उन सबको सब लोग अच्छे प्रकार प्रयुक्त करें ॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे अच्छी शिक्षा को प्राप्त विद्वान् जन घोड़े आदि पशुओं को और अग्नि आदि पदार्थों का प्रयोग कार्य सिद्धि के लिये करते हैं, वैसे अनुष्ठान करो, ऐसे करने से जैसे गौ अपने बछड़े को तृप्त करती हैं, वैसे ये प्रयोग करनेवालों को धनी करते हैं ॥८॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।