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Rigveda Mandal 2 / Sukta 32 / Mantra 8

43 Sukta
8 Mantra
2/32/8
Devata- लिङ्गोक्ताः Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- निच्रृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
या गु॒ङ्गूर्या सि॑नीवा॒ली या रा॒का या सर॑स्वती। इ॒न्द्रा॒णीम॑ह्व ऊ॒तये॑ वरुणा॒नीं स्व॒स्तये॑॥

या । गु॒ङ्गूः । या । सि॒नी॒वा॒ली । या । रा॒का । या । सर॑स्वती । इ॒न्द्रा॒णीम् । अ॒ह्वे॒ । ऊ॒तये॑ । व॒रु॒णा॒नीम् । स्व॒स्तये॑ ॥

Mantra without Swara
या गुङ्गूर्या सिनीवाली या राका या सरस्वती। इन्द्राणीमह्व ऊतये वरुणानीं स्वस्तये॥

या। गुङ्गूः। या। सिनीवाली। या। राका। या। सरस्वती। इन्द्राणीम्। अह्वे। ऊतये। वरुणानीम्। स्वस्तये॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 15 Mantra » 8

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1 Bhashyas
Meaning
हे पुरुषो ! जैसे मैं (या) जो (गुङ्गूः) गुङ्गमुङ्ग बोले वा (या) जो (सिनीवाली) प्रेमास्पद को प्राप्त हुई (या) जो (राका) पौर्णमासी होती वैसी पूर्ण कान्तिमती और (या) जो (सरस्वती) विद्या तथा सुन्दर शिक्षा सहित वाणी से युक्त वर्त्तमान है, उस (इन्द्राणीम्) परमैश्वर्य्ययुक्त को (ऊतये) रक्षा आदि के लिये (अह्वे) बुलाता हूँ उस (वरुणानीम्) श्रेष्ठ की स्त्री को (स्वस्तये) सुख के लिये बुलाता हूँ, वैसे तुम भी अपनी-अपनी स्त्री को बुलाओ ॥८॥
Essence
यदि कोई स्त्री गूँगी और कोई उत्तम सर्वलक्षणसम्पन्न विदुषी हो, उसे ऐश्वर्य और सुख निरन्तर बढ़ाने चाहिये ॥८॥ इस सूक्त में विद्वानों की मित्रता और स्त्री के गुणों का वर्णन होने से इस सूक्त के अर्थ के साथ पिछले सूक्तार्थ की संगति है, यह जानना चाहिये ॥ यह बत्तीसवाँ सूक्त पन्द्रहवाँ वर्ग और तीसरा अनुवाक समाप्त हुआ ॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।