Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 2 / Sukta 32 / Mantra 7

43 Sukta
8 Mantra
2/32/7
Devata- सिनीवाली Rishi- गृत्समदः शौनकः Chhanda- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
या सु॑बा॒हुः स्व॑ङ्गु॒रिः सु॒षूमा॑ बहु॒सूव॑री। तस्यै॑ वि॒श्पत्न्यै॑ ह॒विः सि॑नीवा॒ल्यै जु॑होतन॥

या । सु॒ऽबा॒हुः । सु॒ऽअ॒ङ्गु॒रिः । सु॒ऽसूमा॑ । ब॒हु॒ऽसूव॑री । तस्यै॑ । वि॒श्पत्न्यै॑ । ह॒विः । सि॒नी॒वा॒ल्यै । जु॒हो॒त॒न॒ ॥

Mantra without Swara
या सुबाहुः स्वङ्गुरिः सुषूमा बहुसूवरी। तस्यै विश्पत्न्यै हविः सिनीवाल्यै जुहोतन॥

या। सुऽबाहुः। सुऽअङ्गुरिः। सुऽसूमा। बहुऽसूवरी। तस्यै। विश्पत्न्यै। हविः। सिनीवाल्यै। जुहोतन॥

Ashtak » 2 Adhyay » 7 Varga » 15 Mantra » 7

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! (या) जो (सुबाहुः) सुन्दर बाहु और (स्वङ्गुरिः) सुन्दर अंगुलियोंवाली तथा (सुषूमा) सुन्दर पुत्रोत्पत्ति करने और (बहुसूवरी) बहुत सन्तानों की उत्पन्न करनेरवाली स्त्री है (तस्यै) उस (विश्पत्न्यै) प्रजाजनों की पालनेवाली (सिनीवाल्यै) प्रेम से सम्बद्ध हुई के लिये (हविः) देने योग्य वीर्य को (जुहोतन) छोड़ो ॥७॥
Essence
पुरुषों को यह जानना चाहिये कि वे ही पत्नी उत्तम होती हैं, जो सर्वाङ्ग सुन्दरी बहुत प्रजा उत्पन्न करनेवाली शुभगुणस्वभावयुक्त हों, उनमें से एक-एक पुरुष को चाहिये कि एक-एक स्त्री के साथ विवाह करके प्रजा उत्पन्न करें ॥७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है।